{"_id":"68f00a6094c38d210c0a702b","slug":"despite-the-health-ministers-approval-the-finance-department-returned-the-file-for-an-increase-in-the-stipend-of-medical-interns-samba-news-c-10-jam1004-739746-2025-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: स्वास्थ्य मंत्री की मंजूरी के बावजूद वित्त विभाग ने मेडिकल इंटर्न के वजीफे में बढ़ोतरी की फाइल लौटाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: स्वास्थ्य मंत्री की मंजूरी के बावजूद वित्त विभाग ने मेडिकल इंटर्न के वजीफे में बढ़ोतरी की फाइल लौटाई
Thu, 16 Oct 2025 02:26 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Thu, 16 Oct 2025 02:26 AM IST
विज्ञापन
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न के वजीफे में बढ़ोतरी की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर अटक गई है। वित्त विभाग ने फाइल लौटा दी जबकि स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू ने इसे पहले ही मंजूरी दे दी थी।
सूत्रों ने बताया कि यह मामला जून 2023 का है जब केंद्र शासित प्रदेश में मेडिकल इंटर्न को दिए जाने वाले कम वजीफे की समीक्षा के लिए एक समर्पित वजीफा वृद्धि समिति का गठन किया गया था जो देश में सबसे कम वजीफों में से एक है। बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद कोई अंतिम निर्णय लागू नहीं किया गया।
नवंबर 2024 में वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए थे जिनका बाद में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (एचएंडएमई) विभाग ने लगभग ग्यारह महीने की विस्तृत जांच के बाद समाधान किया। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिव और स्वास्थ्य मंत्री, दोनों ने फाइल की जांच की और उसे मंज़ूरी दी।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार वित्त विभाग ने अधूरे इनपुट का हवाला देते हुए एक बार फिर फाइल लौटा दी है जिससे महीनों की प्रक्रियात्मक प्रक्रिया बेकार हो गई है। इस कदम से मेडिकल इंटर्न्स में रोष व्याप्त है जिन्होंने सरकार पर अंतहीन नौकरशाही के चक्रव्यूह और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया है।
इंटर्न्स के एक प्रतिनिधि ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वास्थ्य मंत्री की मंजूरी के बावजूद फाइल बिना किसी जवाबदेही के विभागों के बीच घूमती रहती है। सैकड़ों युवा डॉक्टरों के भविष्य के साथ बिना किसी कारण के खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने और वित्त विभाग को बिना किसी और देरी के अंतिम मंजूरी जारी करने का निर्देश देने की अपील की है।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि यह मामला जून 2023 का है जब केंद्र शासित प्रदेश में मेडिकल इंटर्न को दिए जाने वाले कम वजीफे की समीक्षा के लिए एक समर्पित वजीफा वृद्धि समिति का गठन किया गया था जो देश में सबसे कम वजीफों में से एक है। बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद कोई अंतिम निर्णय लागू नहीं किया गया।
विज्ञापन
नवंबर 2024 में वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए थे जिनका बाद में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (एचएंडएमई) विभाग ने लगभग ग्यारह महीने की विस्तृत जांच के बाद समाधान किया। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिव और स्वास्थ्य मंत्री, दोनों ने फाइल की जांच की और उसे मंज़ूरी दी।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार वित्त विभाग ने अधूरे इनपुट का हवाला देते हुए एक बार फिर फाइल लौटा दी है जिससे महीनों की प्रक्रियात्मक प्रक्रिया बेकार हो गई है। इस कदम से मेडिकल इंटर्न्स में रोष व्याप्त है जिन्होंने सरकार पर अंतहीन नौकरशाही के चक्रव्यूह और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया है।
इंटर्न्स के एक प्रतिनिधि ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वास्थ्य मंत्री की मंजूरी के बावजूद फाइल बिना किसी जवाबदेही के विभागों के बीच घूमती रहती है। सैकड़ों युवा डॉक्टरों के भविष्य के साथ बिना किसी कारण के खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने और वित्त विभाग को बिना किसी और देरी के अंतिम मंजूरी जारी करने का निर्देश देने की अपील की है।