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तमाम कोशिशों के बावजूद सरकारी स्कूलों में रफ्तार नहीं पकड़ रहा नामांकन
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जम्मू। सरकार की तमाश कोशिशों के बावजूद प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नामांकन रफ्तार नहीं पकड़ रहा है। आओ स्कूल चलें और मिड-डे-मील जैसी योजनाओं के बावजूद सरकारी स्कूलों में नामंकन नहीं बढ़ पा रहा है। जम्मू संभाग में 12 हजार 310 सरकारी स्कूल हैं, जिसमें 6 लाख 54 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं, जबकि 2952 निजी स्कूलों में 5 लाख 37 हजार छात्र-छात्राएं हैं।
संभाग में सरकारी स्कूलों के मुकाबले निजी स्कूलों की संख्या नौ हजार कम है, लेकिन बच्चों के नामांकन में अंतर सिर्फ एक लाख का है। इन आंकड़ों से सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों के रुझान का पता चल जाता है। प्रदेश में एक तरफ निजी स्कूलों की संख्या और उसमें नामांकन में निरंतर बढ़ोतरी होती जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ तमाम प्रयासों के बावजूद सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का रुझान कम होता जा रहा है। छोटे से छोटे शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों में निजी स्कूलों की संख्या बढ़ रही है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले लेक्चरर, मास्टरों के बच्चे भी निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में निजी के मुकाबले ज्यादा शिक्षक हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता के कारण लोगों का विश्वास कम होता जा रहा है। हालांकि, विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ रहा है, पिछले वर्ष नामांकन 6 लाख 26 हजार थे जो इस वर्ष बढ़कर 6 लाख 54 हजार तक पहुंच गए हैं। इस सत्र में पचास हजार नामांकन और बढ़ने की उम्मीद है।
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जम्मू संभाग के जिलों में यह है नामांकन स्थिति
जम्मू जिले में 1574 सरकारी स्कूलों में 80671 विद्यार्थी पढ़ते हैं, जबकि 877 निजी स्कूलों में 2.22 लाख से अधिक नामांकन हैं। वहीं कठुआ में 1454 सरकारी स्कूलों में 69936 विद्यार्थी हैं, जबकि 354 निजी स्कूलों में 61317 हैं। उधमपुर में 1504 सरकारी स्कूलों में 79143, जबकि 270 निजी में 43262 हैं। सांबा में 503 सरकारी स्कूलों में 19729 जबकि 192 निजी में 44192 हैं। राजोरी जैसे पहाड़ी जिलें में 1722 सरकारी स्कूलों में 89887, जबकि 351 निजी में 62147 हैैं। किश्तवाड़ में 812 सरकारी स्कूलों में 35930 जबकि 122 निजी में 14028 हैं। डोडा में 1246 सरकारी स्कूलों में 67186 जबकि 258 निजी में 28662 हैं। पुंछ में 1494 सरकारी स्कूलों में 84370, जबकि 269 निजी में 34966 हैं। रामबन में 872 सरकारी स्कूलों में 58532 जबकि 128 निजी में 13561 हैं। वहीं रियासी में 1129 सरकारी स्कूलों में 58868, जबकि 132 निजी में 14881 का नामांकन हैं।
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संभाग में सरकारी स्कूलों के मुकाबले निजी स्कूलों की संख्या नौ हजार कम है, लेकिन बच्चों के नामांकन में अंतर सिर्फ एक लाख का है। इन आंकड़ों से सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों के रुझान का पता चल जाता है। प्रदेश में एक तरफ निजी स्कूलों की संख्या और उसमें नामांकन में निरंतर बढ़ोतरी होती जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ तमाम प्रयासों के बावजूद सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का रुझान कम होता जा रहा है। छोटे से छोटे शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों में निजी स्कूलों की संख्या बढ़ रही है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले लेक्चरर, मास्टरों के बच्चे भी निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में निजी के मुकाबले ज्यादा शिक्षक हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता के कारण लोगों का विश्वास कम होता जा रहा है। हालांकि, विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ रहा है, पिछले वर्ष नामांकन 6 लाख 26 हजार थे जो इस वर्ष बढ़कर 6 लाख 54 हजार तक पहुंच गए हैं। इस सत्र में पचास हजार नामांकन और बढ़ने की उम्मीद है।
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जम्मू संभाग के जिलों में यह है नामांकन स्थिति
जम्मू जिले में 1574 सरकारी स्कूलों में 80671 विद्यार्थी पढ़ते हैं, जबकि 877 निजी स्कूलों में 2.22 लाख से अधिक नामांकन हैं। वहीं कठुआ में 1454 सरकारी स्कूलों में 69936 विद्यार्थी हैं, जबकि 354 निजी स्कूलों में 61317 हैं। उधमपुर में 1504 सरकारी स्कूलों में 79143, जबकि 270 निजी में 43262 हैं। सांबा में 503 सरकारी स्कूलों में 19729 जबकि 192 निजी में 44192 हैं। राजोरी जैसे पहाड़ी जिलें में 1722 सरकारी स्कूलों में 89887, जबकि 351 निजी में 62147 हैैं। किश्तवाड़ में 812 सरकारी स्कूलों में 35930 जबकि 122 निजी में 14028 हैं। डोडा में 1246 सरकारी स्कूलों में 67186 जबकि 258 निजी में 28662 हैं। पुंछ में 1494 सरकारी स्कूलों में 84370, जबकि 269 निजी में 34966 हैं। रामबन में 872 सरकारी स्कूलों में 58532 जबकि 128 निजी में 13561 हैं। वहीं रियासी में 1129 सरकारी स्कूलों में 58868, जबकि 132 निजी में 14881 का नामांकन हैं।
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