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जल्द पूरी की जाएं लंबित मांगें
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जम्मू। रहबर-ए-तालीम टीचर्स फोरम की रविवार को प्रेस क्लब में चेयरमैन अहमद तांत्रे की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें जहां सरकार से लंबित मांगों को पूरा करने की गुहार लगाई गई वहीं, स्थानांतरण सहित पुरानी पेंशन योजना की बहाली व अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई।
चेयरमैन ने कहा कि रहबर-ए-तालीम शिक्षकों की नियुक्तियां एसआरओ 396 के तहत वर्ष 2000 में शुरू की गई थीं। अस्थायी तौर शिक्षकों ने पांच साल तक स्कूलों में सेवाएं दीं और उसके बाद इन्हें स्थायी कर दिया गया। सरकारी नियम के मुताबिक इन्हें सभी सुविधाएं दी गईं, लेकिन स्थानांतरण का लाभ अभी तक नहीं मिला है। इस अधिकार से रहबर-ए-तालीम शिक्षकों को वंचित रखा गया है। शिक्षक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। फारुक अहमद ने कहा कि सरकार शिक्षकों के साथ अन्याय कर रही है। कई महिला शिक्षकों की अन्य जिलों, तहसीलों या उपमंडलों में शादी हुई है। इस कारण उनकी दिक्कत काफी बढ़ गई है। इसके अलावा स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिन्हें जल्द भरा जाना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन कई स्कूलों में मूलभूत ढांचे को विकसित करने की जरूरत है। सरकार को रहबर-ए-तालीम शिक्षकों के स्थानांतरण की नीति लागू करनी चाहिए। मौके पर शिव देन सिंह, करण सिंह, करनैल सिंह, एम. वानी आदि उपस्थित रहे।
पुरानी पेंशन योजना की जाए बहाल
रहबर-ए-तालीम टीचर्स फोरम ने कहा कि 2010 के बाद जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई है उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अन्य प्रदेशों की तर्ज पर भी उन्हें भी लाभ मिलना चाहिए। इसलिए जम्मू-कश्मीर में पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए।
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राजेश पाल बने आरईटी के क्षेत्रीय अध्यक्ष
उधमपुर के राजेश पाल सिंह को रहबर-ए-तालीम टीचर्स फोरम का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया हैं। बैठक में टीचर फोरम ने उन्हें क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।
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चेयरमैन ने कहा कि रहबर-ए-तालीम शिक्षकों की नियुक्तियां एसआरओ 396 के तहत वर्ष 2000 में शुरू की गई थीं। अस्थायी तौर शिक्षकों ने पांच साल तक स्कूलों में सेवाएं दीं और उसके बाद इन्हें स्थायी कर दिया गया। सरकारी नियम के मुताबिक इन्हें सभी सुविधाएं दी गईं, लेकिन स्थानांतरण का लाभ अभी तक नहीं मिला है। इस अधिकार से रहबर-ए-तालीम शिक्षकों को वंचित रखा गया है। शिक्षक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। फारुक अहमद ने कहा कि सरकार शिक्षकों के साथ अन्याय कर रही है। कई महिला शिक्षकों की अन्य जिलों, तहसीलों या उपमंडलों में शादी हुई है। इस कारण उनकी दिक्कत काफी बढ़ गई है। इसके अलावा स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिन्हें जल्द भरा जाना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन कई स्कूलों में मूलभूत ढांचे को विकसित करने की जरूरत है। सरकार को रहबर-ए-तालीम शिक्षकों के स्थानांतरण की नीति लागू करनी चाहिए। मौके पर शिव देन सिंह, करण सिंह, करनैल सिंह, एम. वानी आदि उपस्थित रहे।
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पुरानी पेंशन योजना की जाए बहाल
रहबर-ए-तालीम टीचर्स फोरम ने कहा कि 2010 के बाद जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई है उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अन्य प्रदेशों की तर्ज पर भी उन्हें भी लाभ मिलना चाहिए। इसलिए जम्मू-कश्मीर में पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए।
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राजेश पाल बने आरईटी के क्षेत्रीय अध्यक्ष
उधमपुर के राजेश पाल सिंह को रहबर-ए-तालीम टीचर्स फोरम का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया हैं। बैठक में टीचर फोरम ने उन्हें क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।