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लेह-जम्मू : रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा- भारत की हर एक इंच जमीन की रक्षा करने में जवान सक्षम

Fri, 19 Nov 2021 12:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लेह/जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, लेह/जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 19 Nov 2021 12:20 AM IST
सार

चीन से गतिरोध के बीच भारत-चीन युद्ध के सबसे चुनौतीपूर्ण मोर्चे की याद में रेजांग ला नए युद्ध स्मारक का किया उद्घाटन। 

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Defense Minister Rajnath said jawans capable of protecting every inch of Indian land
Rajnath in Rezang La front - फोटो : @rajnathsingh

विस्तार

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का चरित्र रहा है कि हमने किसी भी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करने की नीयत नहीं रखी। मगर यदि किसी भी देश ने भारत की ओर आंख उठाकर भी देखा है तो हमने उसे मुंहतोड़ जवाब दिया है। हमारी सेना के बहादुर जवान भारत की हर एक इंच जमीन की रक्षा करने में सक्षम हैं। वह पूर्वी लद्दाख में रेजांग ला युद्ध स्मारक के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। 

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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से जारी गतिरोध के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1962 के युद्ध में भारतीय सेना के साहस और पराक्रम की मिसाल रेजांग ला मोर्चे को याद किया। रक्षा मंत्री ने रेजांग ला में पुनरुद्धार से तैयार किए गए युद्ध स्मारक का उद्घाटन करते हुए कहा कि रेजांग ला में भारतीय सेना की बहादुरी का अध्याय इतिहास के पन्नों के साथ हमारे दिलों की धकड़न में भी हमेशा के लिए दर्ज है।
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राजनाथ ने कहा, 18 हजार फुट की ऊंचाई पर भारतीय सेना के 100 जांबाजों ने चीन को वो क्षति पहुंचाई थी, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। 59 वर्ष पूर्व की वह शौर्यगाथा चीन से युद्ध की सबसे शानदार घटना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रेजांग ला को विश्व में युद्ध इतिहास के दस सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण युद्ध मोर्चों में गिना जाता है। मेजर शैतान सिंह और उनके साथी जवानों ने अंतिम गोली और अंतिम सांस तक दुश्मन के मंसूबों को नाकाम कर बहादुरी व बलिदान का नया अध्याय लिखा था। उन्होंने कहा - मैं उन 114 भारतीय सैनिकों को सलाम करता हूं, जो 1962 के युद्ध में रेजांग ला में प्राणों की आहुति देकर असाधारण वीरगाथा लिखने में कामयाब हुए।
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व्हील चेयर पर ब्रिगेडियर को साथ लेकर चले रक्षा मंत्री 
ऐतिहासिक रेजांग ला मोर्चे पर भारतीय सेना का हिस्सा रहे ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) आरबी जटार भी रेजांग ला लाए गए। व्हील चेयर पर बैठे जटार को खुद रक्षा मंत्री अपने साथ लेकर चले। उन्होंने कहा कि वे ब्रिगेडियर जटार के प्रति सम्मान से भरे हुए हैं। वे उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करते हैं।

18 घंटे के घनघोर युद्ध में लिखी थी पराक्रम की दास्तान
रेजांग ला मोर्चे पर चीन और भारत की सेनाओं में 18 नवंबर 1962 की सुबह चार बजे से घनघोर युद्ध शुरू हुआ था। कुमाउं रेजीमेंट में 13वीं बटालियन की सी कंपनी का नेतृत्व मेजर शैतान सिंह कर रहे थे। चीन के सैनिकों की संख्या बहुत ज्यादा होने पर भी सी कंपनी के जांबाजों ने रेजांग ला नहीं छोड़ा। दुश्मन को रेजांग ला में भारतीय सेना से कहीं ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। मेजर शैतान सिंह समेत उनके साथी जवानों ने चीनी सेना से लड़ते वीरगति प्राप्त की। मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।


एलएसी पर अभी भी दोनों तरफ 50-60 हजार सैनिक
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध के बीच भारत और चीन की सेनाओं का भारी जमावड़ा है। डेढ़ साल से जारी तनातनी को खत्म करने के लिए 13 चरण की बातचीत हो चुकी है। भारतीय सेना ने हाल ही में कहा था कि तेरहवें चरण की बातचीत के बावजूद गतिरोध जारी है। एलएसी के दोनों तरफ संवेदनशील सेक्टर में 50 से 60 हजार सैनिक तैनात हैं।

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