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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Decision of Jammu and Kashmir High Court: Anganwadi helpers should not be fired at present if they are serving, Social Welfare Department had taken a decision to discharge 918 helpers

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट : सेवारत हैं तो फिलहाल न निकाले जाएं आंगनबाड़ी हेल्पर, समाज कल्याण विभाग ने 918 हेल्परों को सेवामुक्त करने का लिया था निर्यण  

Fri, 10 Dec 2021 01:59 AM IST
विमल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 10 Dec 2021 01:59 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने समाज कल्याण विभाग के निर्यण पर लगाई रोक। कहा, वर्तमान में आंगनबाड़ी हेल्पर सेवाएं दे रहे हैं तो तैनात रहने दें और मानदेय का भुगतान भी करे सरकार। 
 

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Decision of Jammu and Kashmir High Court: Anganwadi helpers should not be fired at present if they are serving, Social Welfare Department had taken a decision to discharge 918 helpers
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने समाज कल्याण विभाग में कार्यरत 918 आंगनबाड़ी हेल्परों को सेवामुक्त करने के फैसले पर सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि सरकार जवाब दाखिल करे और सुपरवाइजरों के हेल्पर यदि वर्तमान में विभाग के साथ काम कर रहे हैं तो उनकी सेवाएं अगली तारीख तक जारी रखी जाएं। उन्हें मानदेय का भुगतान भी किया जाए।

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समाज कल्याण विभाग ने 27 अगस्त को आदेश जारी कर सुपरवाइजरों के साथ नियुक्त 918 हेल्परों की सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया था। इस मामले में याचिका दायर कर अदालत से आदेश रद्द करने की मांग के साथ आईसीडीएस परियोजना में कार्यरत रहने की अनुमति देने की मांग की है।
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सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने कहा, हेल्पर यदि वर्तमान में सेवाएं दे रहे हैं तो उन्हें न हटाया जाए। इस पर अंतिम फैसला सरकार की आपत्तियों पर निर्भर करेगा। न्यायमूर्ति ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 15 मार्च 2022 निर्धारित की।
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न्यायालय में याचिका दायर कर प्रभावितों ने कहा कि समाज कल्याण विभाग में आयुक्त सचिव और आईसीडीएस मिशन निदेशक ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 और 226 का हवाला देकर अन्याय किया है। सरकार की योजना के तमाम मानदंडों पर खरा उतरने के बाद ही वे सेवाएं दे रहे हैं।

इसके बावजूद मनमाना, न्यायपूर्ण और तर्कों के विरुद्ध आदेश जारी किया गया है। याचिका में बकाया मानदेय के भुगतान करने की मांग की गई है। कोर्ट से सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है, जिसमें रिक्त पदों की संख्या को देखते हुए योजना बनाकर रोजगार देने पर जोर दिया गया है।


2019 से नहीं मिला मानदेय
याचिका में कहा गया है कि निरंतर सेवाएं देने के बावजूद हेल्परों को 2019 से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत हेल्परों को आंगनबाड़ी केंद्र चलाने के लिए सुपरवाइजरों के साथ नियुक्त किया गया था।

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