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भगवान नरसिंह जयंती पर हुआ हवन यज्ञ का आयोजन
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आरएस पुरा। कस्बे के वार्ड-5 स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में मंगलवार को भगवान नृसिंह जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई । ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत राजेश बिट्टू की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में हवन यज्ञ हुआ। बाद में झंडा फहराने की रस्म अदा कर सत्संग एवं भंडारा भी किया गया।
महंत राजेश बिट्टू ने बताया कि मंदिर में हर साल भगवान नृसिंह की जयंती मनाई जाती है। इस बार कोरोना के चलते छोटे स्तर पर मनाया गया है। उन्होंने बताया यह भगवान विष्णु के अवतारों में से चौथा अवतार है। भगवान विष्णु जब नृसिंह अवतार के रूप में प्रकट हुए तो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी थी। तभी से इस तिथि को नृसिंह जयंती के रूप में मनाई जाती है। पुराणों में मान्यता है कि इस दिन नृसिंह भगवान की पूजा करने से सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है। इंसान की हर मनोकामना पूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि इस दौरान भगवान से प्रार्थना की गई है कि विश्व में फैली कोरोना महामारी से जल्द निजात मिले। इस दौरान महंत विष्णु दास, डॉ. राहुल शास्त्री, कुसुम हिंदू, मनोज गिरी, दकशीष शर्मा, खेमराज शास्त्री, आशीष शर्मा तथा ब्रह्मदेव विशेष तौर पर मौजूद रहे।
लोगों ने घरों में मनाई श्रीनृसिंह जयंती
विजयपुर। श्रीनृसिंह जयंती मंगलवार को लोगों ने घरों में मनाई। भक्तों ने बताया कि भगवान श्रीनृसिंह श्रीहरि के चौथे अवतार माने जाते हैं। हमेशा की तरह विष्णु भगवान ने यह अवतार भी अपने भक्त के कल्याण के लिए ही धारण किया था। इसी दिन भगवान श्रीनृसिंह ने खंभे को चीरकर भक्त प्रहलाद की रक्षार्थ अवतार लिया था। इसलिए इस दिन उनका जयंती उत्सव मनाया जाता है।
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उनका सिर सिंह का था और शरीर मानव का। इसलिए उनका नाम नृसिंह पड़ा। नृसिंह शब्द का अर्थ है मानव सिंह, सिर के साथ-साथ उनके पंजे भी सिंह के थे। उन्होंने बताया कि श्रीनृसिंह जयंती के दिन जो भी भक्त व्रत करके इनकी कथा पढ़ता या सुनता है, उसके पापों का अंत हो जाता है। सारे दुऱ्ख दूर हो जाते हैं और मुरादें पूरी होती हैं। कोरोना के चलते लोगों ने घरों में ही पूजा अर्चना की। इस मौके पर लोगों ने घर के आसपास जरूरतमंदों को मास्क, कपडे़ आदि दान किए। संवाद
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महंत राजेश बिट्टू ने बताया कि मंदिर में हर साल भगवान नृसिंह की जयंती मनाई जाती है। इस बार कोरोना के चलते छोटे स्तर पर मनाया गया है। उन्होंने बताया यह भगवान विष्णु के अवतारों में से चौथा अवतार है। भगवान विष्णु जब नृसिंह अवतार के रूप में प्रकट हुए तो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी थी। तभी से इस तिथि को नृसिंह जयंती के रूप में मनाई जाती है। पुराणों में मान्यता है कि इस दिन नृसिंह भगवान की पूजा करने से सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है। इंसान की हर मनोकामना पूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि इस दौरान भगवान से प्रार्थना की गई है कि विश्व में फैली कोरोना महामारी से जल्द निजात मिले। इस दौरान महंत विष्णु दास, डॉ. राहुल शास्त्री, कुसुम हिंदू, मनोज गिरी, दकशीष शर्मा, खेमराज शास्त्री, आशीष शर्मा तथा ब्रह्मदेव विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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लोगों ने घरों में मनाई श्रीनृसिंह जयंती
विजयपुर। श्रीनृसिंह जयंती मंगलवार को लोगों ने घरों में मनाई। भक्तों ने बताया कि भगवान श्रीनृसिंह श्रीहरि के चौथे अवतार माने जाते हैं। हमेशा की तरह विष्णु भगवान ने यह अवतार भी अपने भक्त के कल्याण के लिए ही धारण किया था। इसी दिन भगवान श्रीनृसिंह ने खंभे को चीरकर भक्त प्रहलाद की रक्षार्थ अवतार लिया था। इसलिए इस दिन उनका जयंती उत्सव मनाया जाता है।
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उनका सिर सिंह का था और शरीर मानव का। इसलिए उनका नाम नृसिंह पड़ा। नृसिंह शब्द का अर्थ है मानव सिंह, सिर के साथ-साथ उनके पंजे भी सिंह के थे। उन्होंने बताया कि श्रीनृसिंह जयंती के दिन जो भी भक्त व्रत करके इनकी कथा पढ़ता या सुनता है, उसके पापों का अंत हो जाता है। सारे दुऱ्ख दूर हो जाते हैं और मुरादें पूरी होती हैं। कोरोना के चलते लोगों ने घरों में ही पूजा अर्चना की। इस मौके पर लोगों ने घर के आसपास जरूरतमंदों को मास्क, कपडे़ आदि दान किए। संवाद