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Jammu News: घाटी की परंपरा को संजोए ''सों मीरास''
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हेरिटेज फेस्टिवल 'सों मीरास' में पारंपरिक तरीके से धान कूटता कलाकार।
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- हेरिटेज फेस्टिवल में सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया
- पहले दिन पेंटिंग व सुलेख प्रतियोगिता करवाई गई
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करने के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है। इसके लिए श्रीनगर में मंगलवार को हेरिटेज फेस्टिवल ''सों मीरास'' का आगाज हुआ। इसमें प्रदर्शनियों और कला के माध्यम से स्थानीय परंपरा और संस्कृति को उजागर किया गया। डीसी डॉ. बिलाल मोहि-उद-दीन भट्ट ने झेलम रिवर फ्रंट पर मेगा इवेंट के पहले चरण की शुरुआत की।
28 फरवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम में पहले दिन पहले दिन पेंटिंग व सुलेख प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें पारंपरिक गांवों और सर्दियों की तैयारियों की प्रदर्शनी, पारंपरिक पोशाक मार्च, पेंटिंग प्रतियोगिता, शिकारा कार्यक्रम, लोक कथाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियों को शामिल किया गया है, जो वर्तमान पीढ़ी को सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के बारे में जानने व अपने समुदाय के भीतर अपनेपन की भावना विकसित करने के लिए एक जीवंत मंच प्रदान करते हैं। डीसी ने कहा कि झेलम रिवर फ्रंट, पोलो व्यू, डल झील और कश्मीर हाट में कार्यक्रम होंगे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
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- पहले दिन पेंटिंग व सुलेख प्रतियोगिता करवाई गई
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करने के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है। इसके लिए श्रीनगर में मंगलवार को हेरिटेज फेस्टिवल ''सों मीरास'' का आगाज हुआ। इसमें प्रदर्शनियों और कला के माध्यम से स्थानीय परंपरा और संस्कृति को उजागर किया गया। डीसी डॉ. बिलाल मोहि-उद-दीन भट्ट ने झेलम रिवर फ्रंट पर मेगा इवेंट के पहले चरण की शुरुआत की।
28 फरवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम में पहले दिन पहले दिन पेंटिंग व सुलेख प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें पारंपरिक गांवों और सर्दियों की तैयारियों की प्रदर्शनी, पारंपरिक पोशाक मार्च, पेंटिंग प्रतियोगिता, शिकारा कार्यक्रम, लोक कथाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियों को शामिल किया गया है, जो वर्तमान पीढ़ी को सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के बारे में जानने व अपने समुदाय के भीतर अपनेपन की भावना विकसित करने के लिए एक जीवंत मंच प्रदान करते हैं। डीसी ने कहा कि झेलम रिवर फ्रंट, पोलो व्यू, डल झील और कश्मीर हाट में कार्यक्रम होंगे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
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