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डब्ल्यूसीसी के शिल्प मंचों की शृंखला शुरू करने की संभावना तलाश रहे : कदुम्मी
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-, एलजी मनोज सिन्हा ने कारीगरों को किया पुरस्कृत
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। विश्व शिल्प परिषद (डब्ल्यूसीसी) के अध्यक्ष साद अल-कदुम्मी ने कहा कि डब्ल्यूसीसी को जम्मू-कश्मीर में अपने नए प्रमुख कार्यक्रम, शिल्प की प्रमाणिकता की मुहर शुरू करने पर गर्व है। कदुम्मी ने कहा, हम प्रमुख संस्थानों में डब्ल्यूसीसी के शिल्प मंचों की एक शृंखला शुरू करने की संभावना भी देख रहे हैं।
वह शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में डब्ल्यूसीसी के 60वें जयंती समारोह में बोल रहे थे। श्रीनगर 27 नवंबर तक समारोह की मेजबानी कर रहा है। कदुम्मी ने कहा, यह उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ श्रीनगर की मेरी पिछली यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं से उपजा एक विजन है। हम आगे बढ़ने के साथ-साथ कई और पहल को गति देने के लिए तत्पर हैं।
कदुम्मी ने कहा, कश्मीर में पश्मीना शॉल,पेपरमाशी कृतियों, अखरोट की लकड़ी की तैरती हुई उत्कृष्ट कृतियों को तैयार करने वाले कुशल कारीगरों से लेकर दुनिया भर के घरों को सजाने वाले जीवंत कालीनों तक का शिल्प परंपरा, जुनून और अद्वितीय रचनात्मकता की कहानी कहता है। डब्ल्यूसीसी के 15 देशों के प्रतिनिधि समारोह में भाग ले रहे हैं। कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, यूके, आयरलैंड, मध्य एशिया और अन्य विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य कारीगरों के साथ अपनी असाधारण शिल्पकला का प्रदर्शन कर रहे हैं।
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आयोजन से हमें मंच मिला: परवानेह
ईरान के शीराज से आई परवानेह अमीरियन ने कहा, मैं हैंडमेड ड्रेस की डिजाइनर हूं। इस कला को तैयार करने में काफी समय लगता है। कभी-कभी छह महीने लग जाते हैं। डब्ल्यूसीसी के इस आयोजन से हमें अपनी कला को दुनिया भर में प्रदर्शित करने के लिए एक मंच मिलता है।
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श्रीनगर आकर अच्छा लगा: बोर्तनिकोवा
रूस से आई मार्गरिटा बोर्तनिकोवा ने कहा, वह कॉटन क्रोशिया का काम करती हैं। करीब दस से अधिक देशों का दौरा कर चुकी हैं। ऐसे कार्यक्रमों से एक कारीगर को अपनी कला प्रदर्शित करने का मौका मिलता है। श्रीनगर आकर अच्छा लगा। यहां के कारीगरों की कला भी काफी अच्छी है।
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रियासी की आशू को फुलकारी के लिए सम्मान
रियासी की आशू शर्मा, जिन्हें फुलकारी के लिए अवार्ड दिया गया है। उन्होंने कहा, आज युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और मोबाइल पर व्यस्त रहती है। हाथ की कढ़ाई की तरफ उनका कम ध्यान है। युवाओं को इस ओर ध्यान देना चाहिए।एक दुपट्टे को तैयार करने में डेढ़ महीना लग जाता है। करीब 200 से 300 दिहाड़ी मिल पाती है। घर बैठी महिलाएं इसका लाभ उठाएं। मेरे साथ करीब 20 महिलाएं जुड़ी हैं। हम ऑनलाइन-- उत्पाद बेचते हैं।
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घाटी की कला और शिल्प को बढ़ाने में मदद मिलेगी: मुश्ताक
स्थानीय पश्मीना कारीगर मुश्ताक अहमद ने कहा कि श्रीनगर को विश्व शिल्प शहर के रूप में मान्यता मिलने से घाटी की कला और शिल्प को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। धोखाधड़ी से कारीगर प्रभावित होते हैं। इसका मुकाबला करने के लिए केंद्र के साथ-साथ प्रदेश सरकार ने जीआई टैगिंग की शुरुआत की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। विश्व शिल्प परिषद (डब्ल्यूसीसी) के अध्यक्ष साद अल-कदुम्मी ने कहा कि डब्ल्यूसीसी को जम्मू-कश्मीर में अपने नए प्रमुख कार्यक्रम, शिल्प की प्रमाणिकता की मुहर शुरू करने पर गर्व है। कदुम्मी ने कहा, हम प्रमुख संस्थानों में डब्ल्यूसीसी के शिल्प मंचों की एक शृंखला शुरू करने की संभावना भी देख रहे हैं।
वह शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में डब्ल्यूसीसी के 60वें जयंती समारोह में बोल रहे थे। श्रीनगर 27 नवंबर तक समारोह की मेजबानी कर रहा है। कदुम्मी ने कहा, यह उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ श्रीनगर की मेरी पिछली यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं से उपजा एक विजन है। हम आगे बढ़ने के साथ-साथ कई और पहल को गति देने के लिए तत्पर हैं।
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कदुम्मी ने कहा, कश्मीर में पश्मीना शॉल,पेपरमाशी कृतियों, अखरोट की लकड़ी की तैरती हुई उत्कृष्ट कृतियों को तैयार करने वाले कुशल कारीगरों से लेकर दुनिया भर के घरों को सजाने वाले जीवंत कालीनों तक का शिल्प परंपरा, जुनून और अद्वितीय रचनात्मकता की कहानी कहता है। डब्ल्यूसीसी के 15 देशों के प्रतिनिधि समारोह में भाग ले रहे हैं। कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, यूके, आयरलैंड, मध्य एशिया और अन्य विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य कारीगरों के साथ अपनी असाधारण शिल्पकला का प्रदर्शन कर रहे हैं।
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आयोजन से हमें मंच मिला: परवानेह
ईरान के शीराज से आई परवानेह अमीरियन ने कहा, मैं हैंडमेड ड्रेस की डिजाइनर हूं। इस कला को तैयार करने में काफी समय लगता है। कभी-कभी छह महीने लग जाते हैं। डब्ल्यूसीसी के इस आयोजन से हमें अपनी कला को दुनिया भर में प्रदर्शित करने के लिए एक मंच मिलता है।
श्रीनगर आकर अच्छा लगा: बोर्तनिकोवा
रूस से आई मार्गरिटा बोर्तनिकोवा ने कहा, वह कॉटन क्रोशिया का काम करती हैं। करीब दस से अधिक देशों का दौरा कर चुकी हैं। ऐसे कार्यक्रमों से एक कारीगर को अपनी कला प्रदर्शित करने का मौका मिलता है। श्रीनगर आकर अच्छा लगा। यहां के कारीगरों की कला भी काफी अच्छी है।
रियासी की आशू को फुलकारी के लिए सम्मान
रियासी की आशू शर्मा, जिन्हें फुलकारी के लिए अवार्ड दिया गया है। उन्होंने कहा, आज युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और मोबाइल पर व्यस्त रहती है। हाथ की कढ़ाई की तरफ उनका कम ध्यान है। युवाओं को इस ओर ध्यान देना चाहिए।एक दुपट्टे को तैयार करने में डेढ़ महीना लग जाता है। करीब 200 से 300 दिहाड़ी मिल पाती है। घर बैठी महिलाएं इसका लाभ उठाएं। मेरे साथ करीब 20 महिलाएं जुड़ी हैं। हम ऑनलाइन
घाटी की कला और शिल्प को बढ़ाने में मदद मिलेगी: मुश्ताक
स्थानीय पश्मीना कारीगर मुश्ताक अहमद ने कहा कि श्रीनगर को विश्व शिल्प शहर के रूप में मान्यता मिलने से घाटी की कला और शिल्प को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। धोखाधड़ी से कारीगर प्रभावित होते हैं। इसका मुकाबला करने के लिए केंद्र के साथ-साथ प्रदेश सरकार ने जीआई टैगिंग की शुरुआत की है।