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Kathua : जम्मू-कश्मीर की रंजीत सागर झील में अब दौड़ेंगे क्रूज, बदलेगी टूरिस्ट सर्किट की तकदीर

Mon, 17 Jun 2024 11:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा साहिल खजूरिया, कठुआ
साहिल खजूरिया, कठुआ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 17 Jun 2024 11:05 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश से सटी जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित चला गांव और बनी की हसीन वादियों में पर्यटकों के लिए तीन से पांच सितारा होटल की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ पश्मीना शॉल और चित्रकला के लिए प्रसिद्ध अतंरराष्ट्रीय कला नगर बसोहली में पर्यटन का विस्तार होगा।

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Cruises will now run in Ranjit sagar dam kathua of Jammu and Kashmir
जीत सागर झील file - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वो दिन दूर नहीं जब बसोहली की रंजीत सागर झील में बनारस की तर्ज पर क्रूज बोट चलना शुरू हो जाएंगे। हिमाचल प्रदेश से सटी जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित चला गांव और बनी की हसीन वादियों में पर्यटकों के लिए तीन से पांच सितारा होटल की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ पश्मीना शॉल और चित्रकला के लिए प्रसिद्ध अतंरराष्ट्रीय कला नगर बसोहली में पर्यटन का विस्तार होगा।

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भारत दर्शन 2.0 योजना के तहत देश के 57 चिह्नित लोकेशन में से बसोहली भी एक है, जिसे पर्यटन मंत्रालय ने थीम आधारित पर्यटन सर्किट के विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत अधिसूचित किया है। फिलहाल पर्यटन मंत्रालय इन टूरिस्ट सर्किट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने में जुटा हुआ है।

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बसोहली, बनी और सरथल तक के इस टूरिस्ट सर्किट में सबसे बड़ा क्षेत्रफल रंजीत सागर झील का है, जिसे सरकार पहले ही अंतर्देशीय जलमार्ग के रूप में मान्यता दे चुकी है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार को भारत दर्शन चरण 2.0 के तहत 300 करोड़ रुपये की परियोजनाएं बनाकर भेजी गई हैं, जिनसे इन इलाकों के दिन बहुरेंगे। पर्यटन बढ़ने के साथ रोजगार के द्वार खुलेंगे। दरअसल इस टूरिज्म सर्किट को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से बनी-बसोहली विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है।

बीते कुछ वर्षों में पर्यटन की गतिविधियां तो इलाके में शुरू हुईं, लेकिन ज्यादा बदलाव नहीं ला पाईं। इस बार परियोजना में आम लोगों के मनोरंजन से लेकर स्थानीय रोजगार और होम स्टे की व्यवस्था को तरजीह दी गई है। 

ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि भारत दर्शन का यह चरण-2 बसोहली से बनी और फिर सरथल से भद्रवाह सर्किट को जोड़कर सीधा हिमाचल और पंजाब के पर्यटकों को आकर्षित कर पाएगा। दरअसल इस योजना के तहत सरकार का मकसद टिकाऊ ढांचों के साथ-साथ निवेश को आकर्षित करना है। लिहाजा आने वाले समय में पीपीपी मोड पर भी यहां कई सुविधाओं का विस्तार किया जाना तय है।

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राष्ट्रीय जलमार्ग-84 में पर्यटन को मिलेगा विस्तार

केंद्र सरकार ने बसोहली में अटल सेतु के जरिए सड़क मार्ग से जुड़े हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को जलमार्ग से भी जोड़ने की कवायद शुरू की थी। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा रावी दरिया को राष्ट्रीय जलमार्ग 84 घोषित कर भारतीय राजपत्र में भी शामिल किया गया है।

लगभग 44 किलोमीटर के इस जलमार्ग में पर्यटन के साथ-साथ जलमार्गों की टैपिंग, अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी, मत्स्य पालन की संभावनाओं, जलमार्ग से सटे और सड़क मार्ग से दूर इलाकों को सीधे तौर पर जोड़ने सहित माल ढुलाई व यात्रियों को विभिन्न इलाकों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

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