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किसान की आंखों के सामने खेत में ही जल गई महीनों की मेहनत
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ंथान में गेंहू की फसल में लगी आग को बुझाने का प्रयास करते हुए ग्रामीण।
- फोटो : REASI
रियासी। तहसील अरनास के कंथान क्षेत्र में रविवार को एक किसान ने अपनी पक चुकी फसल को आग से तबाह होते देखा है। वह तैयार फसल से गेहूं निकालने की तैयारी कर रहा था। लेकिन, एक आग की चिंगारी ने उसकी महीनों की मेहनत राख कर दी।
जानकारी के मुताबिक कंथान निवासी लाल चंद की गेहूं की फसल कुछ दिन पहले ही तैयार हुई थी। फसल काटने के बाद उसने मेहनत से फसल को इकट्ठा कर लिया था। रविवार को वह अपनी मेहनत का फल उस फसल से निकालने वाला था। उसने मशीन तैयार की और गेहूं की बाली से गेहूं निकालने की तैयारी की। लेकिन, तभी अचानक मशीन में शॉर्ट सर्किट हुआ और एक आग की चिंगारी उठी, जिसने लाल चंद की महीनों की मेहनत कुछ पल में ही राख बना दी। इस दौरान किसान की हालत हाथ आई लेकिन मुंह न लगी जैसी थी।
फसल में आग लगने का वह भयानक मंजर लाल चंद अपने परिवार के साथ देख रहा था। मौके पर आग बुझाने के लिए कोई साधन न होने के कारण वह आग पर काबू नहीं पा सका। और कुछ ही देर में पूरी फसल जल गई। आग लगने का पता चलते ही मौके पर कुछ ग्रामीण भी पहुंचे। उन्होंने बाल्टी और अन्य बर्तनों से पानी डालकर फसल को बचाने का प्रयास किया। लेकिन, तब तक आग ने फसल को जला दिया था।
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इस फसल के साथ लाल चंद की कई उम्मीदें भी जल गईं। बताया जाता है कि उक्त परिवार का ज्यादातर भरण पोषण इसी फसल से होता था। लेकिन, आग ने उनके सभी अरमानों को राख कर दिया।
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जानकारी के मुताबिक कंथान निवासी लाल चंद की गेहूं की फसल कुछ दिन पहले ही तैयार हुई थी। फसल काटने के बाद उसने मेहनत से फसल को इकट्ठा कर लिया था। रविवार को वह अपनी मेहनत का फल उस फसल से निकालने वाला था। उसने मशीन तैयार की और गेहूं की बाली से गेहूं निकालने की तैयारी की। लेकिन, तभी अचानक मशीन में शॉर्ट सर्किट हुआ और एक आग की चिंगारी उठी, जिसने लाल चंद की महीनों की मेहनत कुछ पल में ही राख बना दी। इस दौरान किसान की हालत हाथ आई लेकिन मुंह न लगी जैसी थी।
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फसल में आग लगने का वह भयानक मंजर लाल चंद अपने परिवार के साथ देख रहा था। मौके पर आग बुझाने के लिए कोई साधन न होने के कारण वह आग पर काबू नहीं पा सका। और कुछ ही देर में पूरी फसल जल गई। आग लगने का पता चलते ही मौके पर कुछ ग्रामीण भी पहुंचे। उन्होंने बाल्टी और अन्य बर्तनों से पानी डालकर फसल को बचाने का प्रयास किया। लेकिन, तब तक आग ने फसल को जला दिया था।
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इस फसल के साथ लाल चंद की कई उम्मीदें भी जल गईं। बताया जाता है कि उक्त परिवार का ज्यादातर भरण पोषण इसी फसल से होता था। लेकिन, आग ने उनके सभी अरमानों को राख कर दिया।