छात्रा से बलात्कार करने वाले दो टीचर्स को मिली कड़ी सजा
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नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म करने वाले दो शिक्षकों शहजाद आलम और गुलाम मुस्तफा को प्रिंसिपल सेशन जज पुंछ जफर हुसैन बेग की अदालत ने 10-10 साल की कठोर सजा सुनाई है, जबकि एक अन्य आरोपी मोहम्मद अयूब के खिलाफ आरोप सिद्ध न होने पर अदालत ने उसे रिहा कर दिया।
पुलिस में दर्ज केस के अनुसार 17 अक्तूबर, 2007 को सरकारी हाई स्कूल के शिक्षक मोहम्मद अयूब, शहजाद मन्हास और गुलाम मुस्तफा के खिलाफ पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के अनुसार आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी और छठी कक्षा की एक छात्रा को मास्टर मोहम्मद अयूब ने दोपहर 12 बजे अपने घर से हाजिरी रजिस्टर लाने के लिए भेजा।
रोती-बिलखती रही मासूम छात्राएं
पहले से ही दो शिक्षक शहजाद आलम और गुलाम मुस्तफा छिपकर बैठे थे। वे दोनों छात्राओं को कमरे के अंदर ले गए और दरवाजा बंद कर लिया। दोनों आरोपियों ने छात्राओं के साथ जबरदस्ती शुरू कर दी।
छात्राओं के रोने और शोर मचाने पर पड़ोसी शहजाद और जाहिर वहां पहुंचे और छात्रों को उनके चुंगल से छुड़ाया। घटना की जानकारी मिलते ही गांव के लोग जमा हो गए।
आरोपी शिक्षकों के खिलाफ नियमों के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने भी कार्रवाई की। पुलिस स्टेशन सुरनकोट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। दोनों छात्राओं के न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए गए।
कड़ी सजा के साथ लगाया गया जुर्माना
मामले की सुनवाई करते हुए प्रिंसिपल सेशन जज ने पाया कि मामले का ट्रायल सात साल चला और इस दौरान आरोपी कस्टडी में रहे। आरोपी शिक्षक हैं और उन्होंने अपनी ही छात्राओं से दुष्कर्म किया।
तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने शहजाद आलम और गुलाम मुस्तफा को आरपीसी की धारा 376 (1) के तहत 10-10 साल की कठोर सजा दी।
साथ ही पांच-पांच सौ रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने की सूरत में उन्हें 6-6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा धारा 342 के तहत 2-2 माह की सजा भुगतनी होगी। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
जेएनएफ