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खेतों में खड़ी 74 कनाल गेहूं की फसल जली
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आरएस पुरा/बिश्नाह/ सांबा। सीमावर्ती गांव मोटे अलावा सांबा और बिश्नाह में आग लगने से करीब 175 कनाल गेहूं की फसल स्वाहा हो गई। इनमें सांबा और आरएस पुरा में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट रहा है। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया है। आग से 28 किसानों को नुकसान पहुंचा है।
आरएसपुरा में रविवार दोपहर को शाट सर्किट के चलते गेहूं के खेत में आग लग गई। इसमें 13 किसानों की 74 कनाल खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। दोपहर में लगी आग पर किसानों ने काबू पाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सके। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तक काफी नुकसान हो चुका था।
किसानों ने बताया कि मोटे गांव में खेतों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन बिछी हुई। रविवार की दोपहर में बिजली की तारों में शार्ट सर्किट हुआ और उससे गेहूं की फसल में आग लग गई। देखते ही देखते आग इतनी तेजी से फैल गई कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया। खेतों से धुआं उठता देख गांव के लोग उसी तरफ दौड़ पड़े और आग बुझाने का प्रयास करने लगे। आग बेकाबू होती देख दमकल विभाग को सूचना दी गई। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सरपंच ओमकार सिंह ने किसानों की जली गेहूं की फसल पर सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार की ओर से राहत राशि मुहैया कराने का प्रावधान नहीं होने पर किसान वर्ग की अनदेखी हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की आग से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। आग में किसान पम्मी देवी पत्नी मनोहर लाल की 18, जवाहर सिंह पुत्र नंद सिंह की 16, शाम लाल पुत्र अमरनाथ की 4, रतन लाल पुत्र लक्ष्मण दास की 4, मदन लाल पुत्र अजीत राज की 4, बलवंत राज पुत्र कर्म चंद की 4, गुरिंद्र सिंह पुत्र गुरदीप सिंह की 2, जगबीर सिंह पुत्र करतार चंद की 4, जनक राज पुत्र मिलखी राम की 4, स्वर्ण लाल पुत्र मुलख राज की 4, योगराज पुत्र अमरनाथ की 4, सरफो देवी पत्नी सुरेंद्र राज की 4, नानक सिंह पुत्र इंद्रराज की 2 कनाल गेहूं की फसल जल गई।
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बिश्नाह में 10 किसानों की 75 कनाल गेहूं की फसल जली: गांव बरमाल व चक्क छिब्बू में आग लगने से दस किसानों की 75 कनाल खेतों में खड़ी गेहूं फसल जल कर राख हो गई। आग लगने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची दमकल विभाग की गाड़ी व किसानों के सहयोग से आग पर काबू पाया जा सका। रविवार सुबह करीब साढ़े दस बजे लोगों ने खेतों से धुआं निकलते देखा तो उन्होंने फौरन पुलिस को सूचित किया और मौके पर पहुंच गए। उन्होंने देखा कि गेहूं के खेतों में आग लगी हुुई है। वह आग पर काबू पाने का प्रयास करने लगे, लेकिन करीब 75 कनाल फसल जल कर राख हो गई। प्रभावित किसानों की पहचान तारा चंद, दर्शन लाल, अशोक कुमार, भारत भूषण, राम दास, नगर मल, राम लाल, क्रिशन गोपाल, अश्वनी कुमार व सुरम चंद निवासी बरमाल के रूप में हुई है। ब्यूरो
सांबा में आग में 20 कनाल गेहूं की फसल स्वाहा: शार्ट सर्किट से आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। जिले के मनोहर गोपाला छटाला कैंप में रविवार को लगी आग से 20 कनाल गेहूं की फसल जलकर स्वाहा हो गई। जानकारी के अनुसार दोपहर बाद छटाला कैंप क्षेत्र के किसान तिलक राज निवासी कठिलाई की 6 कनाल, बैंस राम निवासी बिलोरी की 3 कनाल, जंगवीर सिंह निवासी मंडी पुशवालियां की 8 कनाल और गुरदेव निवासी बिलोरी की 3 कनाल गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई। दमकल विभाग के कर्मियों ने आग फैलने से रोका। किसानों के अनुसार यदि कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई तो किसानों को अधिक नुकसान उठाना पडे़गा। ब्यूरो
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आग से जली फसल का नहीं मिलता उचित मुआवजा
शार्ट सर्किट से जलने वाली फसल पर मुआवजे का प्रावधान नहीं
अज्ञात कारणों से लगी आग पर दो सौ रुपये कनाल के हिसाब से मिलती है मदद
अमर उजाला ब्यूरो
अरनिया। कृषि प्रधान क्षेत्र के किसान गेहूं फसल को लेकर चिंता में डूबे हैं। इसका मुख्य कारण आए दिन गेहूं फसल में आग लगना माना जा रहा है। किसानों के अनुसार हर वर्ष हजारों कनाल खेतों में खड़ी पकी पकाई फसल आग के हादसों से जलकर राख हो जाती है। इस पर प्रशासन खानापूर्ति के लिए नुकसान के साथ नाम भी लिख देता है। मगर आज तक किसी भी किसान को इसका मुआवजा नहीं मिला।
सूत्रों के अनुसार बिजली की तारों से निकलने वाली चिंगारी से जलकर राख होने वाली फसल का मुआवजा या अन्य प्रकार की राहत देने का किसी भी सरकार के पास न तो प्रावधान है और न ही इस केस के लिए किसानों को मुआवजा देने के लिए क़ानून पास हुआ है। इससे हर वर्ष हजारों लोगों के मुंह तक निवाला पहुंचने से पहले ही आग की भेंट चढ़ जाता है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से कुदरती तौर या मौसम की मार से खराब फसल का दो सौ रुपये प्रति कनाल मुआवजा देने का प्रावधान है मगर बिजली की तारों से आग लगने पर मुआवजा देने का अब तक कोई प्रावधान नहीं बना है न ही राहत देने के लिए क़ानून में संशोधन किया गया है।
पूर्व सरपंच डाक्टर रघुवीर सिंह, कमल सिंह, दर्शन लाल, कृष्ण गोपाल, वीर सिंह व खेरू राम आदि किसानों का कहना है कि हर वर्ष हम गेहूं फसल जलने का दंश झेलते हैं मगर अभी तक न तो हमें इसका मुआवजा मिला और न ही कोई ऐसे उपाय किए गए जिससे इसकी रोकथाम की जाए।
कैसे मिल सकती है थोड़ी सी राहत: खेतों में खड़ी या पड़ी फसल में आग लगने का मुख्य कारण ऊपर से जा रही बिजली की तारों से निकलने वाली चिंगारी बनता है। जो पल में खेतों में खड़ी गेहूं फसल को राख कर देती है। उसके बाद प्रभावित किसानों का नुकसान सहित पटवारी, दमकल विभाग व पुलिस एक लिस्ट तैयार करती है। प्राथमिकी दर्ज होती है, और अंत में दो सौ रुपये प्रति कनाल मुआवजा दिया जाता है।
कैसे मिल सकती है दो सौ रुपये की राहत: किसानों के अनुसार फसल में आग लगने के बाद थाने में नामों सहित दर्ज प्राथमिकी में बिजली की तारों से निकलने चिंगारी के स्थान पर अज्ञात कारणों से लगी आग लिखवाना पड़ेगा ताकि प्रावधान के तहत मुआवजे की आस बनी रहे।
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गेहूं की कटाई के लिए कंबाइन मशीन का इंतजार
सांबा। किसानों की गेहूं की फसल पक कर तैयार हो चुकी है। सीमावर्ती गांवों में श्रमिक कम ही पहुंचते हैं। अब किसानों को कंबाइन मशीन का इंतजार है। किसान बलवीर सिंह, राजकुमार, पूथी सिंह, हंस राज आदि ने बताया कि पाकिस्तानी गोलीबारी के डर से श्रमिक सीमावर्ती गांवों तक नहीं पहुंचते हैं। वहीं गोलीबारी के डर से वह भी अपने परिजनों को सीमा के निकट गेहूं की कटाई के लिए नहीं जाने देते हैं। ऐसे में अब उन्हें कंबाइन मशीन का इंतजार है। उनके अनुसार गेंहु की फसल पक चुकी है। जैसे ही आसमान पर बादल होते हैं तो चिंता सताने लगती है। कई किसानों ने दूर दराज जाकर कंबाइन मशीन आपरेटरों से संपर्क कर उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में आने को कहा है, लेकिन उन्हें नहीं लगता है कि एक सप्ताह तक कोई कंबाइन मशीन सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचेगी, क्योंकि अभी अधिकतर किसानों की फसलें खेतों में ही खड़ी हैं। ब्यूरो
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आरएसपुरा में रविवार दोपहर को शाट सर्किट के चलते गेहूं के खेत में आग लग गई। इसमें 13 किसानों की 74 कनाल खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। दोपहर में लगी आग पर किसानों ने काबू पाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सके। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तक काफी नुकसान हो चुका था।
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किसानों ने बताया कि मोटे गांव में खेतों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन बिछी हुई। रविवार की दोपहर में बिजली की तारों में शार्ट सर्किट हुआ और उससे गेहूं की फसल में आग लग गई। देखते ही देखते आग इतनी तेजी से फैल गई कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया। खेतों से धुआं उठता देख गांव के लोग उसी तरफ दौड़ पड़े और आग बुझाने का प्रयास करने लगे। आग बेकाबू होती देख दमकल विभाग को सूचना दी गई। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सरपंच ओमकार सिंह ने किसानों की जली गेहूं की फसल पर सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार की ओर से राहत राशि मुहैया कराने का प्रावधान नहीं होने पर किसान वर्ग की अनदेखी हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की आग से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। आग में किसान पम्मी देवी पत्नी मनोहर लाल की 18, जवाहर सिंह पुत्र नंद सिंह की 16, शाम लाल पुत्र अमरनाथ की 4, रतन लाल पुत्र लक्ष्मण दास की 4, मदन लाल पुत्र अजीत राज की 4, बलवंत राज पुत्र कर्म चंद की 4, गुरिंद्र सिंह पुत्र गुरदीप सिंह की 2, जगबीर सिंह पुत्र करतार चंद की 4, जनक राज पुत्र मिलखी राम की 4, स्वर्ण लाल पुत्र मुलख राज की 4, योगराज पुत्र अमरनाथ की 4, सरफो देवी पत्नी सुरेंद्र राज की 4, नानक सिंह पुत्र इंद्रराज की 2 कनाल गेहूं की फसल जल गई।
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बिश्नाह में 10 किसानों की 75 कनाल गेहूं की फसल जली: गांव बरमाल व चक्क छिब्बू में आग लगने से दस किसानों की 75 कनाल खेतों में खड़ी गेहूं फसल जल कर राख हो गई। आग लगने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची दमकल विभाग की गाड़ी व किसानों के सहयोग से आग पर काबू पाया जा सका। रविवार सुबह करीब साढ़े दस बजे लोगों ने खेतों से धुआं निकलते देखा तो उन्होंने फौरन पुलिस को सूचित किया और मौके पर पहुंच गए। उन्होंने देखा कि गेहूं के खेतों में आग लगी हुुई है। वह आग पर काबू पाने का प्रयास करने लगे, लेकिन करीब 75 कनाल फसल जल कर राख हो गई। प्रभावित किसानों की पहचान तारा चंद, दर्शन लाल, अशोक कुमार, भारत भूषण, राम दास, नगर मल, राम लाल, क्रिशन गोपाल, अश्वनी कुमार व सुरम चंद निवासी बरमाल के रूप में हुई है। ब्यूरो
सांबा में आग में 20 कनाल गेहूं की फसल स्वाहा: शार्ट सर्किट से आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। जिले के मनोहर गोपाला छटाला कैंप में रविवार को लगी आग से 20 कनाल गेहूं की फसल जलकर स्वाहा हो गई। जानकारी के अनुसार दोपहर बाद छटाला कैंप क्षेत्र के किसान तिलक राज निवासी कठिलाई की 6 कनाल, बैंस राम निवासी बिलोरी की 3 कनाल, जंगवीर सिंह निवासी मंडी पुशवालियां की 8 कनाल और गुरदेव निवासी बिलोरी की 3 कनाल गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई। दमकल विभाग के कर्मियों ने आग फैलने से रोका। किसानों के अनुसार यदि कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई तो किसानों को अधिक नुकसान उठाना पडे़गा। ब्यूरो
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आग से जली फसल का नहीं मिलता उचित मुआवजा
शार्ट सर्किट से जलने वाली फसल पर मुआवजे का प्रावधान नहीं
अज्ञात कारणों से लगी आग पर दो सौ रुपये कनाल के हिसाब से मिलती है मदद
अमर उजाला ब्यूरो
अरनिया। कृषि प्रधान क्षेत्र के किसान गेहूं फसल को लेकर चिंता में डूबे हैं। इसका मुख्य कारण आए दिन गेहूं फसल में आग लगना माना जा रहा है। किसानों के अनुसार हर वर्ष हजारों कनाल खेतों में खड़ी पकी पकाई फसल आग के हादसों से जलकर राख हो जाती है। इस पर प्रशासन खानापूर्ति के लिए नुकसान के साथ नाम भी लिख देता है। मगर आज तक किसी भी किसान को इसका मुआवजा नहीं मिला।
सूत्रों के अनुसार बिजली की तारों से निकलने वाली चिंगारी से जलकर राख होने वाली फसल का मुआवजा या अन्य प्रकार की राहत देने का किसी भी सरकार के पास न तो प्रावधान है और न ही इस केस के लिए किसानों को मुआवजा देने के लिए क़ानून पास हुआ है। इससे हर वर्ष हजारों लोगों के मुंह तक निवाला पहुंचने से पहले ही आग की भेंट चढ़ जाता है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से कुदरती तौर या मौसम की मार से खराब फसल का दो सौ रुपये प्रति कनाल मुआवजा देने का प्रावधान है मगर बिजली की तारों से आग लगने पर मुआवजा देने का अब तक कोई प्रावधान नहीं बना है न ही राहत देने के लिए क़ानून में संशोधन किया गया है।
पूर्व सरपंच डाक्टर रघुवीर सिंह, कमल सिंह, दर्शन लाल, कृष्ण गोपाल, वीर सिंह व खेरू राम आदि किसानों का कहना है कि हर वर्ष हम गेहूं फसल जलने का दंश झेलते हैं मगर अभी तक न तो हमें इसका मुआवजा मिला और न ही कोई ऐसे उपाय किए गए जिससे इसकी रोकथाम की जाए।
कैसे मिल सकती है थोड़ी सी राहत: खेतों में खड़ी या पड़ी फसल में आग लगने का मुख्य कारण ऊपर से जा रही बिजली की तारों से निकलने वाली चिंगारी बनता है। जो पल में खेतों में खड़ी गेहूं फसल को राख कर देती है। उसके बाद प्रभावित किसानों का नुकसान सहित पटवारी, दमकल विभाग व पुलिस एक लिस्ट तैयार करती है। प्राथमिकी दर्ज होती है, और अंत में दो सौ रुपये प्रति कनाल मुआवजा दिया जाता है।
कैसे मिल सकती है दो सौ रुपये की राहत: किसानों के अनुसार फसल में आग लगने के बाद थाने में नामों सहित दर्ज प्राथमिकी में बिजली की तारों से निकलने चिंगारी के स्थान पर अज्ञात कारणों से लगी आग लिखवाना पड़ेगा ताकि प्रावधान के तहत मुआवजे की आस बनी रहे।
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गेहूं की कटाई के लिए कंबाइन मशीन का इंतजार
सांबा। किसानों की गेहूं की फसल पक कर तैयार हो चुकी है। सीमावर्ती गांवों में श्रमिक कम ही पहुंचते हैं। अब किसानों को कंबाइन मशीन का इंतजार है। किसान बलवीर सिंह, राजकुमार, पूथी सिंह, हंस राज आदि ने बताया कि पाकिस्तानी गोलीबारी के डर से श्रमिक सीमावर्ती गांवों तक नहीं पहुंचते हैं। वहीं गोलीबारी के डर से वह भी अपने परिजनों को सीमा के निकट गेहूं की कटाई के लिए नहीं जाने देते हैं। ऐसे में अब उन्हें कंबाइन मशीन का इंतजार है। उनके अनुसार गेंहु की फसल पक चुकी है। जैसे ही आसमान पर बादल होते हैं तो चिंता सताने लगती है। कई किसानों ने दूर दराज जाकर कंबाइन मशीन आपरेटरों से संपर्क कर उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में आने को कहा है, लेकिन उन्हें नहीं लगता है कि एक सप्ताह तक कोई कंबाइन मशीन सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचेगी, क्योंकि अभी अधिकतर किसानों की फसलें खेतों में ही खड़ी हैं। ब्यूरो