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आतंक के साये में रहे परिवार व जवान
Updated Mon, 12 Feb 2018 01:45 AM IST
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जम्मू। सुंजवां में हुए फिदायीन हमले के कारण दो दिन तक फौजी के परिवार के सदस्य आतंक के साये में रहे। डेढ़ दिन से इन परिवारों को अपने क्वार्टर में ही रहने का आदेश दिया गया था। कोई बाहर नहीं आया। देर रात तीन बजे के बाद उन्हें सुरक्षित निकाला गया।
सुंजवां ब्रिगेड में जैकलाई में तैनात विनोद कुमार के भाई ने अमर उजाला को बताया कि वह भी विजयपुर में सेना में ही तैनात है। उसके पिता कृष्ण देव और भतीजा सुंजवां क्वार्टरों में ही हैं। पिता, भाई और भतीजे की मुसीबत की जानकारी मिलने पर वह उनसे मिलने के लिए आया है। रविवार की सुबह ही पिता से फोन पर बात हुई। अब वह संतुष्ट है। उसकी भाभी गर्भवती है। वीरवार से ही भाभी मिलिट्री अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल जाकर भाभी से मिला। भाभी भी बाल-बाल बच गईं और घरवाले भी सुरक्षित हैं। अब वह अंदर जाकर परिवार के अन्य सदस्यों से मिलना चाहता है, लेकिन उसे सेना ने अंदर नहीं जाने दिया गया। विनोद के भाई ने कहा कि इन हमलों से उसे कोई दिक्कत नहीं है। वह भी देश का सिपाही है और उसके पिता भी सेना से रिटायर हैं। अंदर जाकर केवल परिवार वालों से हालचाल जानना चाह रहा था। उसने कहा कि महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण केवी स्कूल में छुट्टी थी। इस कारण नुकसान कम हुआ है और कई परिवार और बच्चे बाल-बाल बच गए।
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सुंजवां ब्रिगेड में जैकलाई में तैनात विनोद कुमार के भाई ने अमर उजाला को बताया कि वह भी विजयपुर में सेना में ही तैनात है। उसके पिता कृष्ण देव और भतीजा सुंजवां क्वार्टरों में ही हैं। पिता, भाई और भतीजे की मुसीबत की जानकारी मिलने पर वह उनसे मिलने के लिए आया है। रविवार की सुबह ही पिता से फोन पर बात हुई। अब वह संतुष्ट है। उसकी भाभी गर्भवती है। वीरवार से ही भाभी मिलिट्री अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल जाकर भाभी से मिला। भाभी भी बाल-बाल बच गईं और घरवाले भी सुरक्षित हैं। अब वह अंदर जाकर परिवार के अन्य सदस्यों से मिलना चाहता है, लेकिन उसे सेना ने अंदर नहीं जाने दिया गया। विनोद के भाई ने कहा कि इन हमलों से उसे कोई दिक्कत नहीं है। वह भी देश का सिपाही है और उसके पिता भी सेना से रिटायर हैं। अंदर जाकर केवल परिवार वालों से हालचाल जानना चाह रहा था। उसने कहा कि महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण केवी स्कूल में छुट्टी थी। इस कारण नुकसान कम हुआ है और कई परिवार और बच्चे बाल-बाल बच गए।
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