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Jammu News: सुंब-गोरन के जंगल में खैर पर चल रही आरी
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- ग्रामीणों ने निगरानी व्यवस्था पर उठाए सवाल, कत्था उद्योग की खपत बनी वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिले के पहाड़ी क्षेत्र सुंब और गोरन के जंगल में खैर के पेड़ों की अवैध कटान के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। इससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कत्था बनाने वाली इकाइयों में खैर की लकड़ी की अधिक खपत से कुछ अराजक तत्व इस अवसर का फायदा उठा रहे हैं। जंगलों से लकड़ी निकालकर सप्लाई करने का एक संगठित तंत्र सक्रिय होने की बात भी सामने आ रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी ने बताया कि रात के समय जंगलों में हलचल बढ़ जाती है। कुछ लोग नियमित तौर पर लकड़ी काटकर ले जाते हैं लेकिन कार्रवाई सीमित नजर आती है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि कभी-कभार लकड़ी जब्त होने की खबर आती है लेकिन असल में बड़ा काम लगातार चलता रहता है। अगर सख्ती हो तो यह तुरंत रुक सकता है।
क्षेत्र के एक जानकार का कहना है कि मांग ज्यादा है इसलिए सप्लाई का नेटवर्क भी बना हुआ है। सांबा और आसपास कत्था बनाने वाली फैक्टरियों में खैर की लकड़ी की भारी मांग है। आरोप लगाया कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से गोरखधंदा जारी है। जरूरत इस बात की है कि निगरानी को और मजबूत किया जाए और जिम्मेदारी तय हो।
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पर्यावरण विशेषज्ञ दीदार सिंह ने चेतावनी दी है कि इस तरह की कटान से पारिस्थितिकी संतुलन पर असर पड़ सकता है। समय रहते सख्त कदम उठाना जरूरी हैं।
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विभाग अवैध कटान को लेकर सतर्क है। समय-समय पर विभाग गश्त और कार्रवाई कर रहा है। जहां भी इस तरह की गतिविधियों की सूचना मिलती है तुरंत टीम भेजकर कार्रवाई की जाती है। यदि कहीं पर अवैध कटान हो रही है तो विभाग को इसकी सूचना दें।
- हिताशी शर्मा, सोशल फॉरेस्ट्री विभाग
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ये मामले आए सामने
- 5 मार्च, 2026 को नड्ड क्षेत्र में खैर की अवैध कटान का मामला सामने आया।
- 20 मार्च, 2026 : बेला गोरन में खैर के लट्ठे बरामद कर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।
- 2 फरवरी, 2026 : गोरन के चनोरी क्षेत्र में पुलिस ने अवैध रूप से काटी गई खैर की लकड़ी बरामद कर प्राथमिकी दर्ज की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिले के पहाड़ी क्षेत्र सुंब और गोरन के जंगल में खैर के पेड़ों की अवैध कटान के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। इससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कत्था बनाने वाली इकाइयों में खैर की लकड़ी की अधिक खपत से कुछ अराजक तत्व इस अवसर का फायदा उठा रहे हैं। जंगलों से लकड़ी निकालकर सप्लाई करने का एक संगठित तंत्र सक्रिय होने की बात भी सामने आ रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी ने बताया कि रात के समय जंगलों में हलचल बढ़ जाती है। कुछ लोग नियमित तौर पर लकड़ी काटकर ले जाते हैं लेकिन कार्रवाई सीमित नजर आती है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि कभी-कभार लकड़ी जब्त होने की खबर आती है लेकिन असल में बड़ा काम लगातार चलता रहता है। अगर सख्ती हो तो यह तुरंत रुक सकता है।
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क्षेत्र के एक जानकार का कहना है कि मांग ज्यादा है इसलिए सप्लाई का नेटवर्क भी बना हुआ है। सांबा और आसपास कत्था बनाने वाली फैक्टरियों में खैर की लकड़ी की भारी मांग है। आरोप लगाया कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से गोरखधंदा जारी है। जरूरत इस बात की है कि निगरानी को और मजबूत किया जाए और जिम्मेदारी तय हो।
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पर्यावरण विशेषज्ञ दीदार सिंह ने चेतावनी दी है कि इस तरह की कटान से पारिस्थितिकी संतुलन पर असर पड़ सकता है। समय रहते सख्त कदम उठाना जरूरी हैं।
विभाग अवैध कटान को लेकर सतर्क है। समय-समय पर विभाग गश्त और कार्रवाई कर रहा है। जहां भी इस तरह की गतिविधियों की सूचना मिलती है तुरंत टीम भेजकर कार्रवाई की जाती है। यदि कहीं पर अवैध कटान हो रही है तो विभाग को इसकी सूचना दें।
- हिताशी शर्मा, सोशल फॉरेस्ट्री विभाग
ये मामले आए सामने
- 5 मार्च, 2026 को नड्ड क्षेत्र में खैर की अवैध कटान का मामला सामने आया।
- 20 मार्च, 2026 : बेला गोरन में खैर के लट्ठे बरामद कर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।
- 2 फरवरी, 2026 : गोरन के चनोरी क्षेत्र में पुलिस ने अवैध रूप से काटी गई खैर की लकड़ी बरामद कर प्राथमिकी दर्ज की।