श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने एसबीआई के पूर्व मैनेजर पर सच्चाई सामने नहीं लाने के लिए 25000 का जुर्माना लगाया है। पूर्व मैनेजर मदन लाल गोरिया ने मुख्य महाप्रबंधक, अपीलीय प्राधिकरण, एसबीआई की ओर से पारित एक अप्रैल, 2014 के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। इसके तहत एसबीआई अधिकारी सेवा विनियम के नियम 67 (एच) के अनुसार, अनिवार्य सेवानिवृत्ति का जुर्माना उन पर लगाया गया है। 54 वर्षीय गोरिया ने उनकी समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए समीक्षा प्राधिकरण द्वारा पारित 14 मार्च 2018 के आदेश को रद्द करने की भी मांग की थी। न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की एकल पीठ ने कहा, क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की कमी व याचिकाकर्ता (गोरिया) के अदालत के समक्ष तथ्य पेश करने में विफलता के कारण, यह अदालत मामले के गुण-दोष पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है। रिकॉर्ड पर मौजूद सभी तथ्यों, प्रतिद्वंद्वी पक्षों के रुख और प्रस्तुत तर्कों का विश्लेषण करने के बाद, यह न्यायालय इस विचार पर पहुंचा है कि वर्तमान याचिका गलत, झूठी, तुच्छ है और खारिज किए जाने योग्य है। न्यायालय ने एसबीआई द्वारा उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड की जांच करते हुए पाया कि गोरिया ने पहले हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की थी, जिसे एक मार्च 2013 के आदेश के तहत खारिज कर दिया गया था। इसमें ऐसे तथ्य और परिस्थितियां शामिल थीं जो वर्तमान मामले से काफी मिलती-जुलती थीं। हालांकि, बेंच ने कहा, गोरिया ने जान-बूझकर इस महत्वपूर्ण तथ्य को अदालत से छुपाया है। संवाद