{"_id":"663abb67de6a26b6460e71aa","slug":"court-news-jammu-news-c-10-jam1008-355859-2024-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: अदालत को गुमराह करने पर 20 हजार का जुर्माना लगाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: अदालत को गुमराह करने पर 20 हजार का जुर्माना लगाया
विज्ञापन
-कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता का उद्देश्य साफ नहीं
जम्मू। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने पर याचिकाकर्ता पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही याचिका को भी खारिज कर दिया गया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वसीम सादिक नरगल ने मंगलवार को गुलशन कुमार की अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट के समक्ष साफ उद्देश्य के साथ नहीं आया। याचिकाकर्ता यह जानते हुए कि इस मामले में प्रतिवादी संख्या 5 एक आवश्यक पक्ष था फिर भी जान-बूझकर उसे उत्तरदाताओं की सूची से हटा दिया गया। इस प्रकार याचिकाकर्ता का कृत्य अदालत के साथ धोखाधड़ी करने के दायरे में आता है और ऐसे बेईमान व्यकित को जो अदालत के साथ शरारत करते हैं वह बच नहीं सकते। यह अदालत याचिकाकर्ता पर जुर्माने की कार्रवाई को उचित समझती है। कोर्ट ने आदेश दिया कि तथ्यों को दबाने और अदालत के साथ शरारत करने की ऐसी प्रथा की निंदा करने के लिए 20,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। जिसका भुगतान याचिकाकर्ता को चार सप्ताह की अवधि के भीतर अधिवक्ता कल्याण कोष में करना होगा। जेएनएफ
-- -- -- -- -- -- -- --
यह था मामला
बता दें कि गुलशन कुमार कोआपरेटिव सोसायटी के बतौर एमडी 2020 में रिटायर हो गए थे। तब बिना सरकार की सहमति के एक प्रस्ताव पास कर नियुक्ति की अवधि बढ़ा ली। इसे कोआपरेटिव के चेयरमैन हर्षवर्धन ने चुनौती दी। इस पर अमल करते हुए अदालत ने एमडी के प्रस्ताव पर रोक लगा दी। बाद में एमडी ने सीजेएम कोर्ट में दोबारा इसे चुनौती दी और हर्षवर्धन को पार्टी नहीं बनाया। जबकि वह इसमें अहम कड़ी थे। एमडी ने इसकी जानकारी सीजेएम को नहीं दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने पर याचिकाकर्ता पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही याचिका को भी खारिज कर दिया गया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वसीम सादिक नरगल ने मंगलवार को गुलशन कुमार की अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट के समक्ष साफ उद्देश्य के साथ नहीं आया। याचिकाकर्ता यह जानते हुए कि इस मामले में प्रतिवादी संख्या 5 एक आवश्यक पक्ष था फिर भी जान-बूझकर उसे उत्तरदाताओं की सूची से हटा दिया गया। इस प्रकार याचिकाकर्ता का कृत्य अदालत के साथ धोखाधड़ी करने के दायरे में आता है और ऐसे बेईमान व्यकित को जो अदालत के साथ शरारत करते हैं वह बच नहीं सकते। यह अदालत याचिकाकर्ता पर जुर्माने की कार्रवाई को उचित समझती है। कोर्ट ने आदेश दिया कि तथ्यों को दबाने और अदालत के साथ शरारत करने की ऐसी प्रथा की निंदा करने के लिए 20,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। जिसका भुगतान याचिकाकर्ता को चार सप्ताह की अवधि के भीतर अधिवक्ता कल्याण कोष में करना होगा। जेएनएफ
विज्ञापन
यह था मामला
बता दें कि गुलशन कुमार कोआपरेटिव सोसायटी के बतौर एमडी 2020 में रिटायर हो गए थे। तब बिना सरकार की सहमति के एक प्रस्ताव पास कर नियुक्ति की अवधि बढ़ा ली। इसे कोआपरेटिव के चेयरमैन हर्षवर्धन ने चुनौती दी। इस पर अमल करते हुए अदालत ने एमडी के प्रस्ताव पर रोक लगा दी। बाद में एमडी ने सीजेएम कोर्ट में दोबारा इसे चुनौती दी और हर्षवर्धन को पार्टी नहीं बनाया। जबकि वह इसमें अहम कड़ी थे। एमडी ने इसकी जानकारी सीजेएम को नहीं दी।
विज्ञापन