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Jammu News: ट्रांसजेंडरों की सटीक संख्या निर्धारित करे यूटी लद्दाख और जम्मू-कश्मीर प्रशासन
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उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए आदेश
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर व लद्दाख प्रशासन को ट्रांसजेंडरों की संख्या निर्धारित करने का आदेश दिया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह व न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की खंडपीठ ने दोनों प्रदेशों को ट्रांसजेंडरों के बारे में जानकारी मांगने के लिए इलेक्ट्रॉनिक के साथ-साथ प्रिंट मीडिया में विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया। राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ और अन्य (2014) 5 एससीसी 438 मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी किए गए कुछ निर्देशों के अनुसार जनहित याचिका को अदालत में लाया गया है।
खंडपीठ ने कहा, लद्दाख ने ट्रांसजेंडरों से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए विभिन्न उपायों को गिनाते हुए प्रतिक्रिया प्रस्तुत की गई है। हालांकि, उक्त प्रतिक्रिया में यह उल्लेख किया गया है कि ट्रांसजेंडरों की कुल संख्या 6 है। इनमें लद्दाख में 4 और कारगिल में दो है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने इस आंकड़े का गंभीरता से विरोध किया और कहा कि संख्या बड़ी है और इनकी ठीक से पहचान नहीं की गई है। जम्मू-कश्मीर ने भी जवाब दाखिल किया है, जिसमें बताया गया है कि वहां 550 ट्रांसजेंडर हैं, जिनमें से 450 कश्मीर संभाग में हैं और 100 जम्मू संभाग में हैं। इस आंकड़े पर वकील ने तर्क दिया कि दोनों प्रदेशों में हजारों ट्रांसजेंडरों की गिनती नहीं की गई है और यहां रहने वाले ट्रांसजेंडरों की कुल संख्या का उचित पता लगाना जरूरी है। कोर्ट ने कहा, हमारा यह भी विचार है कि जिलेवार ट्रांसजेंडरों की संख्या का उचित पता लगाना वांछनीय होगा ताकि संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए उन तक पहुंच सकें और तदनुसार दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को संबंधित केंद्र शासित प्रदेशों में ट्रांसजेंडरों की संख्या निर्धारित करने के लिए आगे की कवायद करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता यदि चाहे तो आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में ट्रांसजेंडरों की संख्या प्रस्तुत करने के लिए भी स्वतंत्र होगी।” इस संबंध में, अदालत ने कहा कि दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन ट्रांसजेंडरों के बारे में जानकारी मांगने के लिए इलेक्ट्रॉनिक और साथ ही प्रिंट मीडिया में व्यापक रूप से प्रकाशन करके विज्ञापन जारी कर सकते हैं, जिससे न केवल केंद्र शासित प्रदेश में ट्रांसजेंडरों की संख्या निर्धारित करने में मदद मिलेगी। लेकिन जहां भी आवश्यक हो, उन्हें संबंधित जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों द्वारा सहायता प्रदान की जा सकती है।
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खंडपीठ ने कहा, तदनुसार, दोनों केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश जारी करते समय, हम जम्मू-कश्मीर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण और लद्दाख राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश जारी करते हैं, ताकि किसी भी व्यक्ति को आवश्यक सहायता प्रदान की जा सके जो ट्रांसजेंडर होने का दावा कर सकता है और उनका विवरण भी प्रशासन द्वारा दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने 18 मार्च 2024 को जनहित याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर व लद्दाख प्रशासन को ट्रांसजेंडरों की संख्या निर्धारित करने का आदेश दिया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह व न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की खंडपीठ ने दोनों प्रदेशों को ट्रांसजेंडरों के बारे में जानकारी मांगने के लिए इलेक्ट्रॉनिक के साथ-साथ प्रिंट मीडिया में विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया। राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ और अन्य (2014) 5 एससीसी 438 मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी किए गए कुछ निर्देशों के अनुसार जनहित याचिका को अदालत में लाया गया है।
खंडपीठ ने कहा, लद्दाख ने ट्रांसजेंडरों से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए विभिन्न उपायों को गिनाते हुए प्रतिक्रिया प्रस्तुत की गई है। हालांकि, उक्त प्रतिक्रिया में यह उल्लेख किया गया है कि ट्रांसजेंडरों की कुल संख्या 6 है। इनमें लद्दाख में 4 और कारगिल में दो है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने इस आंकड़े का गंभीरता से विरोध किया और कहा कि संख्या बड़ी है और इनकी ठीक से पहचान नहीं की गई है। जम्मू-कश्मीर ने भी जवाब दाखिल किया है, जिसमें बताया गया है कि वहां 550 ट्रांसजेंडर हैं, जिनमें से 450 कश्मीर संभाग में हैं और 100 जम्मू संभाग में हैं। इस आंकड़े पर वकील ने तर्क दिया कि दोनों प्रदेशों में हजारों ट्रांसजेंडरों की गिनती नहीं की गई है और यहां रहने वाले ट्रांसजेंडरों की कुल संख्या का उचित पता लगाना जरूरी है। कोर्ट ने कहा, हमारा यह भी विचार है कि जिलेवार ट्रांसजेंडरों की संख्या का उचित पता लगाना वांछनीय होगा ताकि संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए उन तक पहुंच सकें और तदनुसार दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को संबंधित केंद्र शासित प्रदेशों में ट्रांसजेंडरों की संख्या निर्धारित करने के लिए आगे की कवायद करने का निर्देश दिया।
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कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता यदि चाहे तो आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में ट्रांसजेंडरों की संख्या प्रस्तुत करने के लिए भी स्वतंत्र होगी।” इस संबंध में, अदालत ने कहा कि दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन ट्रांसजेंडरों के बारे में जानकारी मांगने के लिए इलेक्ट्रॉनिक और साथ ही प्रिंट मीडिया में व्यापक रूप से प्रकाशन करके विज्ञापन जारी कर सकते हैं, जिससे न केवल केंद्र शासित प्रदेश में ट्रांसजेंडरों की संख्या निर्धारित करने में मदद मिलेगी। लेकिन जहां भी आवश्यक हो, उन्हें संबंधित जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों द्वारा सहायता प्रदान की जा सकती है।
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खंडपीठ ने कहा, तदनुसार, दोनों केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश जारी करते समय, हम जम्मू-कश्मीर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण और लद्दाख राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश जारी करते हैं, ताकि किसी भी व्यक्ति को आवश्यक सहायता प्रदान की जा सके जो ट्रांसजेंडर होने का दावा कर सकता है और उनका विवरण भी प्रशासन द्वारा दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने 18 मार्च 2024 को जनहित याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।