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Jammu News: किसी केस में दखल से पूर्व अदालतों को व्यापक जनहित देखना चाहिए
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-उच्च न्यायालय ने टिप्पणी के साथ आईआरपी बटालियन मुख्यालय में निर्माण पर रोक का आदेश किया संशोधित
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का मानना है कि अदालतों को किसी भी मामले में हस्तक्षेप करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उक्त मामले में उसके दखल की आवश्यकता है भी या नहीं। सरकार ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की थी जिसमें आईआरपी बटालियन मुख्यालय में निर्माण पर रोक के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया गया थ।
न्यायमूर्ति वसीम सादिक नार्गल की पीठ ने सरकार के आवेदन पर सुनवाई करते हुए कहा, अदालत को किसी मामले में तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब अत्यधिक सार्वजनिक हित प्रभावित हो रहे हों। याचिका के अनुसार, इंडियन रिजर्व पुलिस बटालियन मुख्यालय में भूतल पर मेस कम डाइनिंग हॉल और अलग शौचालय/बाथरूम ब्लॉक 20+20 और सेप्टिक/सोकेज ब्लॉक, 10 दो मंजिला संतरी पोस्ट, चार गार्ड रूम, सड़क के लिए नाली निर्माण, परेड ग्राउंड व खेल स्टेडियम आदि का निर्माण होना है। कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक का आदेश जारी कर दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा, अधिवक्ताओं की राय सुनने के बाद हमारी राय है कि अंतरिम आदेश के जरिये परियोजना को बंद करना किसी के हित में नहीं है, बल्कि यह केवल सार्वजनिक हित के विपरीत है।
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पीठ ने कहा, परियोजना व्यापक जनहित से संबंधित है, इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल भी शामिल है।
अदालत ने कहा, दस्तावेजों के अवलोकन पर पाया गया कि इसमें कोई कमी नहीं है। अदालत के स्थगन आदेश का आशय पूरी निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाना नहीं है। अधिकारियों ने संचार पर रोक को पूरी निविदा प्रक्रिया पर रोक के रूप में गलत समझा है।
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जरूरत पड़ने पर दोबारा हो सकते हैं टेंडर
उच्च न्यायालय ने कहा, यह न्यायालय प्रतिवादियों को आगे बढ़ने की इजाजत देते हुए एर मार्च 2023 के अंतरिम आदेश को संशोधित करना उचित समझता है। आवश्यकता पड़ने पर निविदाएं पुन: आमंत्रित की जा सकती हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का मानना है कि अदालतों को किसी भी मामले में हस्तक्षेप करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उक्त मामले में उसके दखल की आवश्यकता है भी या नहीं। सरकार ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की थी जिसमें आईआरपी बटालियन मुख्यालय में निर्माण पर रोक के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया गया थ।
न्यायमूर्ति वसीम सादिक नार्गल की पीठ ने सरकार के आवेदन पर सुनवाई करते हुए कहा, अदालत को किसी मामले में तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब अत्यधिक सार्वजनिक हित प्रभावित हो रहे हों। याचिका के अनुसार, इंडियन रिजर्व पुलिस बटालियन मुख्यालय में भूतल पर मेस कम डाइनिंग हॉल और अलग शौचालय/बाथरूम ब्लॉक 20+20 और सेप्टिक/सोकेज ब्लॉक, 10 दो मंजिला संतरी पोस्ट, चार गार्ड रूम, सड़क के लिए नाली निर्माण, परेड ग्राउंड व खेल स्टेडियम आदि का निर्माण होना है। कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक का आदेश जारी कर दिया।
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उच्च न्यायालय ने कहा, अधिवक्ताओं की राय सुनने के बाद हमारी राय है कि अंतरिम आदेश के जरिये परियोजना को बंद करना किसी के हित में नहीं है, बल्कि यह केवल सार्वजनिक हित के विपरीत है।
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पीठ ने कहा, परियोजना व्यापक जनहित से संबंधित है, इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल भी शामिल है।
अदालत ने कहा, दस्तावेजों के अवलोकन पर पाया गया कि इसमें कोई कमी नहीं है। अदालत के स्थगन आदेश का आशय पूरी निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाना नहीं है। अधिकारियों ने संचार पर रोक को पूरी निविदा प्रक्रिया पर रोक के रूप में गलत समझा है।
जरूरत पड़ने पर दोबारा हो सकते हैं टेंडर
उच्च न्यायालय ने कहा, यह न्यायालय प्रतिवादियों को आगे बढ़ने की इजाजत देते हुए एर मार्च 2023 के अंतरिम आदेश को संशोधित करना उचित समझता है। आवश्यकता पड़ने पर निविदाएं पुन: आमंत्रित की जा सकती हैं।