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Jammu News: पीडीडी के सहायक अभियंता सचिन टिक्कू का 6 माह में 3 बार तबादला, कैट ने लगाई रोक
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- अधिकारी ने दायर की थी अर्जी, सरकार के खिलाफ आंदोलन में की थी कर्मियों की अगुवाई
जम्मू। सरकार के खिलाफ बिजली विभाग के कर्मियों के हक के लिए लड़ने वाले सहायक अभियंता सचिन टिक्कू का छह माह में तीन बार तबादला किया गया है। इससे आहत अधिकारी ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के समक्ष याचिका दायर की थी। कैट के न्यायिक सदस्य संजीव गुप्ता ने सुनवाई करते हुए तबादले के आदेश पर रोक लगा दी है। टिक्कू ने अर्जी में बताया कि छह महीने में तीन बार तबादला किया गया, जोकि नियम का उल्लंघन है। बता दें कि 2021 में पीडीडी कर्मियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया था, जिसकी अगुवाई सचिन टिक्कू ने की थी।
कैट के न्यायिक सदस्य संजीव गुप्ता ने याचिकाकर्ता के वकील अभिमन्यु शर्मा के साथ वरिष्ठ वकील अभिनव शर्मा की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह सच है कि एक सरकारी कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर और सेवा की तत्कालिकता में सरकार में तैनात होने का कोई निहित अधिकार नहीं है। किसी सरकारी कर्मचारी को समय से पहले स्थानांतरण सहित एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना उसके अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन ऐसा स्थानांतरण दंडात्मक और दुर्भावनापूर्ण नहीं होना चाहिए। वर्तमान मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि छह महीने की छोटी अवधि में तीन बार आवेदक के स्थानांतरण का कोई औचित्य नहीं है। लिहाजा वह अपनी वर्तमान पोस्टिंग पर ही रहें और काम करें। जेएनएफ
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जम्मू। सरकार के खिलाफ बिजली विभाग के कर्मियों के हक के लिए लड़ने वाले सहायक अभियंता सचिन टिक्कू का छह माह में तीन बार तबादला किया गया है। इससे आहत अधिकारी ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के समक्ष याचिका दायर की थी। कैट के न्यायिक सदस्य संजीव गुप्ता ने सुनवाई करते हुए तबादले के आदेश पर रोक लगा दी है। टिक्कू ने अर्जी में बताया कि छह महीने में तीन बार तबादला किया गया, जोकि नियम का उल्लंघन है। बता दें कि 2021 में पीडीडी कर्मियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया था, जिसकी अगुवाई सचिन टिक्कू ने की थी।
कैट के न्यायिक सदस्य संजीव गुप्ता ने याचिकाकर्ता के वकील अभिमन्यु शर्मा के साथ वरिष्ठ वकील अभिनव शर्मा की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह सच है कि एक सरकारी कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर और सेवा की तत्कालिकता में सरकार में तैनात होने का कोई निहित अधिकार नहीं है। किसी सरकारी कर्मचारी को समय से पहले स्थानांतरण सहित एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना उसके अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन ऐसा स्थानांतरण दंडात्मक और दुर्भावनापूर्ण नहीं होना चाहिए। वर्तमान मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि छह महीने की छोटी अवधि में तीन बार आवेदक के स्थानांतरण का कोई औचित्य नहीं है। लिहाजा वह अपनी वर्तमान पोस्टिंग पर ही रहें और काम करें। जेएनएफ
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