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Jammu News: धर्मार्थ ट्रस्ट की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने निराधार आरोप लगाने पर जताई नाराजगी
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- पूर्व कर्मचारी चांद राम के मामले में 50 प्रतिशत बकाया वेतन देने का फैसला बरकरार
-अदालत ने कहा- फैसला 15 दिन में सुनाया गया, पुनर्विचार के बजाय रिकॉल याचिका दाखिल करना गलत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट की याचिका को खारिज कर दिया है। ट्रस्ट ने पूर्व कर्मचारी चांद राम से जुड़े औद्योगिक विवाद में सुनाए गए फैसले को वापस लेने की मांग की थी। वीरवार को सुनवाई के दाैरान न्यायमूर्ति एमए चौधरी ने याचिका को पूरी तरह गलत आधार पर दाखिल बताते हुए न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर लगाए गए आरोपों को तथ्यात्मक रूप से निराधार करार दिया। अदालत ने कहा कि जिस फैसले को कई महीनों तक सुरक्षित रखने का आरोप लगाया गया, वह वास्तव में चार दिसंबर 2025 को सुरक्षित रखा गया था और 19 दिसंबर को सुना दिया गया।
विवाद में औद्योगिक न्यायाधिकरण ने नौ सितंबर 2003 को चांद राम को सेवा समाप्ति की तारीख से फैसले तक का 50 प्रतिशत बकाया वेतन देने का आदेश दिया था। ट्रस्ट ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 19 दिसंबर 2025 को याचिका खारिज हो गई थी। इसके बाद ट्रस्ट ने दलील दी कि फैसले से पहले चांद राम की मृत्यु हो चुकी थी और उनके कानूनी वारिसों को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था।
इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट ने मूल सुनवाई के दौरान कर्मचारी की मृत्यु की जानकारी अदालत को नहीं दी और न ही कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाने की पहल की। फैसले से असंतुष्ट होने पर ट्रस्ट अपील या पुनर्विचार का विकल्प अपना सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अदालत ने याचिका बिना किसी जुर्माने के खारिज कर दी।
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-अदालत ने कहा- फैसला 15 दिन में सुनाया गया, पुनर्विचार के बजाय रिकॉल याचिका दाखिल करना गलत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट की याचिका को खारिज कर दिया है। ट्रस्ट ने पूर्व कर्मचारी चांद राम से जुड़े औद्योगिक विवाद में सुनाए गए फैसले को वापस लेने की मांग की थी। वीरवार को सुनवाई के दाैरान न्यायमूर्ति एमए चौधरी ने याचिका को पूरी तरह गलत आधार पर दाखिल बताते हुए न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर लगाए गए आरोपों को तथ्यात्मक रूप से निराधार करार दिया। अदालत ने कहा कि जिस फैसले को कई महीनों तक सुरक्षित रखने का आरोप लगाया गया, वह वास्तव में चार दिसंबर 2025 को सुरक्षित रखा गया था और 19 दिसंबर को सुना दिया गया।
विवाद में औद्योगिक न्यायाधिकरण ने नौ सितंबर 2003 को चांद राम को सेवा समाप्ति की तारीख से फैसले तक का 50 प्रतिशत बकाया वेतन देने का आदेश दिया था। ट्रस्ट ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 19 दिसंबर 2025 को याचिका खारिज हो गई थी। इसके बाद ट्रस्ट ने दलील दी कि फैसले से पहले चांद राम की मृत्यु हो चुकी थी और उनके कानूनी वारिसों को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था।
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इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट ने मूल सुनवाई के दौरान कर्मचारी की मृत्यु की जानकारी अदालत को नहीं दी और न ही कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाने की पहल की। फैसले से असंतुष्ट होने पर ट्रस्ट अपील या पुनर्विचार का विकल्प अपना सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अदालत ने याचिका बिना किसी जुर्माने के खारिज कर दी।
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