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नईम के खिलाफ उमर की मानहानि याचिका रद्द करने से कोर्ट का इनकार
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जम्मू। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पूर्व मंत्री नईम अख्तर अंद्राबी के खिलाफ मानहानि याचिका को रद्द करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट में जस्टिस विनोद चटर्जी कौल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले को रद्द करना न्याय संगत नहीं है। लिहाजा चुनौती याचिका रद्द की जाती है। दोनों पक्षों को कोर्ट ने 20 जुलाई 2020 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने के निर्देश जारी कर दिए। नईम अख्तर ने कोर्ट से अपील की थी कि ट्रायल कोर्ट की ओर से संज्ञान लेकर जारी आदेश की प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए।
इस मामले में पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि 25 अगस्त 2010 को नईम अख्तर व एक अन्य प्रतिवादी ने श्रीनगर में प्रेस वार्ता में कई बेबुनियाद आरोप लगाए। यह आरोप उनकी छवि खराब करने की मंशा से लगाए गए। उमर ने शिकायत में कहा है कि उनके पास संज्ञान योग्य तथ्यपरक आधार है। सोमवार को सुनवाई में जस्टिस कौल ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने के लिए विशेष परिस्थितियां और आधार होना जरूरी है। हाईकोर्ट तभी आदेश रद्द कर सकता है जब उसे लगे कि यह आदेश प्रभावी नहीं होगा या अदालती प्रक्रिया से कानून का दुरुपयोग हो सकता है अथवा न्याय का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकेगा। इस मामले में ऐसा कुछ प्रतीत नहीं हो रहा।
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इस मामले में पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि 25 अगस्त 2010 को नईम अख्तर व एक अन्य प्रतिवादी ने श्रीनगर में प्रेस वार्ता में कई बेबुनियाद आरोप लगाए। यह आरोप उनकी छवि खराब करने की मंशा से लगाए गए। उमर ने शिकायत में कहा है कि उनके पास संज्ञान योग्य तथ्यपरक आधार है। सोमवार को सुनवाई में जस्टिस कौल ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने के लिए विशेष परिस्थितियां और आधार होना जरूरी है। हाईकोर्ट तभी आदेश रद्द कर सकता है जब उसे लगे कि यह आदेश प्रभावी नहीं होगा या अदालती प्रक्रिया से कानून का दुरुपयोग हो सकता है अथवा न्याय का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकेगा। इस मामले में ऐसा कुछ प्रतीत नहीं हो रहा।
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