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श्रीनगर लोकसभा सीट पर फारूक अब्दुल्ला 11 हजार वोटो से जीते
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Sat, 15 Apr 2017 07:44 PM IST
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पूर्व मुख्यमंत्री डा. फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : File Photo
नेकां प्रत्याशी डा. फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर लोकसभा सीट के उपचुनाव में सत्ताधारी दल के प्रत्याशी नजीर अहमद खान को लगभग 11 हजार मतों के भारी अंतर से पराजित कर पीडीपी से यह सीट छीन ली है। जीत के बाद मतदान के दौरान हुई हिंसा में आठ लोगों के मारे जाने के शोक में नेकां ने किसी प्रकार का जश्न नहीं मनाया।
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श्रीनगर और जम्मू में जश्न के कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए। जीत के बाद फारूक ने शांतिपूर्ण चुनाव का माहौल देने में नाकाम रही महबूबा सरकार को बर्खास्त कर राज्यपाल शासन लगाने की मांग की। चुनाव में 12 लाख 61 हजार 862 मतदाताओं में से 89881 मतदाताओं ने वोट डाले थे। चुनाव में फारूक को 48554 और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी पीडीपी के नजीर को 37779 मत हासिल हुए।
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मतगणना सुबह आठ बजे एसकेआईसीसी में शुरू हुई। शुरू से ही फारूक ने पीडीपी प्रत्याशी से बढ़त बनाए रखी। यह सिलसिला मतगणना समाप्ति तक जारी रहा।
मतगणना स्थल तथा डल झील के आसपास के इलाकों में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। इस सीट के लिए 9 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान भारी हिंसा भड़की थी। इसमें आठ लोगों की जान चली गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। 38 बूथों पर 13 अप्रैल को पुनर्मतदान हुआ था। श्रीनगर सीट के इतिहास में पहली बार सबसे कम मतदान (कुल 7.14 फीसदी) हुआ था।
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रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : FILE PHOTO
चुनाव जीतने के बाद फारूक ने रियासत में राज्यपाल शासन लगाने की मांग करते हुए कहा कि अनंतनाग सीट के चुनाव भी राज्यपाल शासन में ही कराए जाने चाहिएं। दावा किया कि हिंसा में मारे गए आठ लोग शहीद हैं। उन्होंने ऐसा चुनाव पहले कभी नहीं देखा, जिसमें कई लोग जख्मी होकर अस्पतालों में भर्ती हैं तथा कई लोग जेल में बंद हैं।
उन्होंने इन कठिन परिस्थितियों में भी वोट देने के लिए लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने जीत के बाद लोकसभा सीट से इस्तीफा देने की अफवाहों को खारिज किया। साथ ही आर्मी वाहन पर एक युवक को बांधकर घुमाए जाने के वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में यह काफी शर्मनाक है।
उन्होंने शांति बहाली के लिए भारत-पाक के साथ ही हुर्रियत सहित सभी पक्षकारों से बातचीत की वकालत करते हुए कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कम मतदान पर कहा कि यह कोई मायने नहीं रखता। पहले भी इस प्रकार की स्थिति रही है, लेकिन इससे लोकतंत्र पर असर नहीं पड़ा।
उन्होंने इन कठिन परिस्थितियों में भी वोट देने के लिए लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने जीत के बाद लोकसभा सीट से इस्तीफा देने की अफवाहों को खारिज किया। साथ ही आर्मी वाहन पर एक युवक को बांधकर घुमाए जाने के वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में यह काफी शर्मनाक है।
उन्होंने शांति बहाली के लिए भारत-पाक के साथ ही हुर्रियत सहित सभी पक्षकारों से बातचीत की वकालत करते हुए कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कम मतदान पर कहा कि यह कोई मायने नहीं रखता। पहले भी इस प्रकार की स्थिति रही है, लेकिन इससे लोकतंत्र पर असर नहीं पड़ा।