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Jammu Kashmir: जम्मू को अशांत करने की साजिश, पाकिस्तान ने स्लीपर सेल को सौंपा जिम्मा

Fri, 30 Sep 2022 10:05 AM IST
विमल शर्मा ओमपाल संब्याल, जम्मू
ओमपाल संब्याल, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 30 Sep 2022 10:05 AM IST
सार

अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकी वारदातों पर अंकुश तो लगा ही है, प्रदेश में शांति और पर्यटकों, निवेशकों के अनुकूल माहौल का नैरेटिव भी बना है। इस नैरेटिव को रोकने के लिए धमाकों से पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने की कोशिश में है।

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Conspiracy to disturb Jammu Pakistan handed over the responsibility to the sleeper cell
Udhampur Bus Blast - फोटो : पीटीआई

विस्तार

घुसपैठ के मंसूबे नाकाम होने और आतकियों के साथ हथियारों की कमी होने पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अब स्लीपर सेल नेटवर्क को जम्मू संभाग में लो इंटेंसिटी (कम क्षमता) के ज्यादा धमाके करने का जिम्मा सौंपा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से सक्रिय आतंकियों के नेटवर्क की कमर टूट गई है। इसी वजह से कश्मीर घाटी में हाइब्रिड आतंकियों से टारगेट किलिंग और जम्मू में स्लीपर सेल के जरिये स्टिकी बम जैसे रेडीमेड छोटी आईईडी से धमाके कराए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में खासकर जम्मू संभाग में बसों या सार्वजनिक स्थलों पर बम धमाके करने की मोडस ऑपरेंडी (वारदात को अंजाम देने का तरीका) आतंकवाद के शुरुआती दौर में अपनाई जाती थी। वर्ष 1992 से लेकर 1997 तक बसों और सार्वजनिक स्थलों पर बम धमाकों की पांच बड़ी वारदातें हुईं, लेकिन सुरक्षा बलों की सख्ती के साथ ही इस तरह के हमले होना बंद हो गए। करीब ढाई दशक के बाद अब फिर से जम्मू संभाग में यात्री वाहनों में धमाकों का तरीका अपनाना सीमा पार से रची गई नई साजिश का खुलासा करती है। कटड़ा रूट पर वैष्णो देवी यात्रियों की बस में इसी साल 13 मई को धमाका भी इस ट्रेंड की वापसी को दर्शाता है।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकी वारदातों पर अंकुश तो लगा ही है, प्रदेश में शांति और पर्यटकों, निवेशकों के अनुकूल माहौल का नैरेटिव भी बना है। इस नैरेटिव को रोकने के लिए धमाकों से पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने की कोशिश में है। प्रशिक्षित आतंकियों और हथियारों की कमी को देखकर पाकिस्तान ड्रोन से कम क्षमता वाले विफोटक भेज रहा है। स्लीपर सेल से अब इस खेप को ठिकानों तक पहुंचाने के साथ धमाके भी करवाए जा रहे हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान को बड़े हमले पर जवाबी कार्रवाई का भी डर है। इसी वजह से सीमा पार से स्लीपर सेल को छोटे स्तर के ज्यादा हमलों के लिए संचालित किया जा रहा है। - डॉ. जे जगन्नाथन, एचओडी राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू।
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आतंकवाद के पहले दशक में हुए बड़े बम धमाके
  • 7 अक्तूबर 1992  - सुबह केसों मनहासां से जम्मू आई बस में डिगयाना आश्रम के पास पहुंचने पर बम धमाका हुआ जिसमें कई लोगों की मौत हुई।
  • 28 नवंबर 1994 - जम्मू से कटड़ा जा रही बस में रामनगर मोड़ पंज पीर के पास पहुंचते ही विस्फोट हुआ। इस धमाके में भी कई जानें चली गईं थीं।
  • 26 जनवरी 1995 - एमए स्टेडियम में 40 हजार लोगों की मौजूदगी में तीन धमाके हुए जिसमें 8 जानें चली गईं थीं।
  • 20 जुलाई 1995 - जम्मू के पुरानी मंडी इलाके में आरडीएक्स से लदे ऑटोरिक्शा से धमाका किया गया। इसमें 17 लोगों की मौत हो गई और 45 घायल हुए।
  • 29 मार्च 1997 - जम्मू बस स्टैंड के पास भीषण विस्फोट में 15 लोगों की जान गई और 72 लोग घायल हुए। घटनास्थल के पास लोग पंजाबी गायक दलेर मेहंदी का कार्यक्रम देखने आए थे।
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