{"_id":"5e22124d8ebc3e4b5d6740a0","slug":"componsetion-jammu-news-jmu201830355","type":"story","status":"publish","title_hn":"लागत 1000, मुआवजा मात्र 675 रुपये...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लागत 1000, मुआवजा मात्र 675 रुपये...
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अरनिया। धान की फसल के खराब होने की एवज में 675 रुपये प्रति कनाल मुआवजा देने की घोषणा के बाद किसानों में जहां थोड़ी राहत दिखाई दे रही है। वहीं इतनी कम राशि मिलने पर ज्यादातर किसानों में रोष है। किसानों का कहना है कि उनकी लागत 1000 रुपये प्रति कनाल रही है और उसका मुआवजा 675 रुपये प्रति कनाल दिया जाना हास्यास्पद है।
किसानों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा घोषित की गई मुआवजे की राशि से मेहनताना तो दूर लागत भी पूरी नहीं हो पाएगी। इससे एक बार फिर केंद्र सरकार द्वारा किसानों के साथ पक्षपात भरा रवैया उजागर हुआ है। हालांकि करीब 30 प्रतिशत किसानों ने इस मुआवजे की राशि का स्वागत जरूर किया है, मगर 70 प्रतिशत किसानों ने इसे मामूली राहत के तौर पर पक्षपात का आरोप लगाया है।
किसान सांबरिया मोहन का कहना है कि इससे तो किसानों की लागत भी पूरी नहीं हो पाएगी। क्योंकि प्रति कनाल बिजाई, रोपाई, कीट नाशक दवाओं का छिड़काव और खाद आदि सहित करीब एक हजार प्रति कनाल का खर्च हुआ है। उस पर इसे अंतिम पड़ाव तक पहुंचाने के लिए कम से कम पांच माह तक दौड़ धूप भी करनी पड़ी है। पूर्व सरपंच डाक्टर रघुबीर सिंह आदि का कहना है कि मुआवजा तो काफी कम है। इससे लागत तो वापस नहीं मिल रही, मगर फिर भी कुछ हद तक किसानों को राहत जरूर मिलेगी।
विज्ञापन
बिशन कुमार, मंजीत सिंह, तीर्थ राम, मोहन लाल व ब्रेयाम सिंह आदि किसानों का कहना है कि भले ही सरकार ने 675 रुपये प्रति कनाल राशि घोषित कर किसानों के जख्मों पर मामूली मरहम लगाने का काम किया है और इससे कुदरत द्वारा दिए जख्मों की भरपाई नहीं हो सकती, मगर आगामी गेहूं फसल का जख्म भी उभर चुका है, जिससे आने वाले दिनों में किसान वर्ग लगभग टूट जाएगा। क्योंकि इस बार मौसम की मार लागत व कड़ी मेहनत के बाद भी खराब हो चुकी है। उस पर आगामी गेहूं फसल पर भी इसका काफी असर पड़ चुका है। सरकार को किसानों के हितों को देखते हुए मुआवजे की इस मामूली राहत पर विचार करने की जरूरत है।
विज्ञापन
किसानों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा घोषित की गई मुआवजे की राशि से मेहनताना तो दूर लागत भी पूरी नहीं हो पाएगी। इससे एक बार फिर केंद्र सरकार द्वारा किसानों के साथ पक्षपात भरा रवैया उजागर हुआ है। हालांकि करीब 30 प्रतिशत किसानों ने इस मुआवजे की राशि का स्वागत जरूर किया है, मगर 70 प्रतिशत किसानों ने इसे मामूली राहत के तौर पर पक्षपात का आरोप लगाया है।
विज्ञापन
किसान सांबरिया मोहन का कहना है कि इससे तो किसानों की लागत भी पूरी नहीं हो पाएगी। क्योंकि प्रति कनाल बिजाई, रोपाई, कीट नाशक दवाओं का छिड़काव और खाद आदि सहित करीब एक हजार प्रति कनाल का खर्च हुआ है। उस पर इसे अंतिम पड़ाव तक पहुंचाने के लिए कम से कम पांच माह तक दौड़ धूप भी करनी पड़ी है। पूर्व सरपंच डाक्टर रघुबीर सिंह आदि का कहना है कि मुआवजा तो काफी कम है। इससे लागत तो वापस नहीं मिल रही, मगर फिर भी कुछ हद तक किसानों को राहत जरूर मिलेगी।
विज्ञापन
बिशन कुमार, मंजीत सिंह, तीर्थ राम, मोहन लाल व ब्रेयाम सिंह आदि किसानों का कहना है कि भले ही सरकार ने 675 रुपये प्रति कनाल राशि घोषित कर किसानों के जख्मों पर मामूली मरहम लगाने का काम किया है और इससे कुदरत द्वारा दिए जख्मों की भरपाई नहीं हो सकती, मगर आगामी गेहूं फसल का जख्म भी उभर चुका है, जिससे आने वाले दिनों में किसान वर्ग लगभग टूट जाएगा। क्योंकि इस बार मौसम की मार लागत व कड़ी मेहनत के बाद भी खराब हो चुकी है। उस पर आगामी गेहूं फसल पर भी इसका काफी असर पड़ चुका है। सरकार को किसानों के हितों को देखते हुए मुआवजे की इस मामूली राहत पर विचार करने की जरूरत है।