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कड़ाके की ठंड में फ्लाईओवर के नीचे रातें गुजार रहे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग 

Fri, 27 Dec 2019 03:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा संजीव दुबे, जम्मू
संजीव दुबे, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 27 Dec 2019 03:54 AM IST
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Children, women and elderly people spending nights under flyover in the cold winter in valley
demo pic - फोटो : अमर उजाला

केंद्र शासित जम्मू कश्मीर की शीतकालीन राजधानी जम्मू (स्मार्ट सिटी) में कड़ाके की सर्दी में सैंकड़ों लोग फ्लाईओवर के नीचे ठिठुरते हुए रातें गुजारने को मजबूर हैं। गरीबों की ऐसी हालत सरकार के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों और कल्याणकारी योजनाओं के अलावा प्रशासन की सतर्कता की भी पोल खोलती है। इन लोगों में छह महीने के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं।

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प्रशासनिक सतर्कता का आलम तो यह है कि मॉडल पुलिस थाने से करीब दो मीटर की दूरी पर नेशनल हाइवे के बीच बने फ्लाई ओवर के नीचे सैंकड़ों लोग रात गुजारते हैं। यह दिन में इसी क्षेत्र के आसपास काम धंधा करते हैं और रात को फिर लौट कर यहीं सोने आ जाते हैं। दिन के समय यह लोग गुब्बारे आदि बेचकर रोजी-रोटी कमाते हैं। 
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सौ से ज्यादा की संख्या में यह लोग फ्लाई ओवर के आसपास दिखते हैं। इनमें महिलाएं, बच्चे और गुब्बारे बनाते पुरुषों के समूह से कड़ाके की सर्दी में दिन और रात में यहां कष्टदायक जिंदगी बिताने का कारण पूछने पर यह लोग जल्दी से कुछ नहीं बताते। इन्हें कंबल देने या आर्थिक मदद करने की बात करें तो यह हिंदी में बताते हैं कि वह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के रहने वाले हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। 
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कोई सरकारी मदद न मिलने की वजह से जम्मू आकर गुब्बारे आदि बनाकर रोजी-रोटी कमा रहे हैं। किराये का मकान लेने जितने वह रुपये नहीं कमा पाते। 

इन लोगों को मिलेगी राहत : डीसी 
डीसी सुषमा चौहान के संज्ञान में मामला लाने पर उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। अब इन लोगों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

नगर निगम के पास आसरा देने को इमारत नहीं: मेयर 

मेयर चंद्र मोहन गुप्ता के अनुसार कड़ाके की सर्दी में खुले में रात गुजारने के मामले की जानकारी मिलने भर से उन्हें कष्ट की अनुभूति हो रही है। लेकिन निगम के पास ऐसे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कोई इमारत नहीं है। भूमि की निशानदेही कर आसरा घर बनाने का प्रस्ताव जरूर है। इन लोगों को तत्काल राहत मिले इसके लिए वह डीसी व अन्य अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाएंगे।

बाबू जी, ठंड से जान निकलती है...कंबल दे दीजिए 

उम्र 10 से 12 साल, बहती नाक। जुबां पर बस यह शब्द बाबू जी, ठंड से जान निकलती है कंबल दे दीजिए। बालिका ने अपना नाम विदूरी बताया। उसने कहा वह परिवार के अन्य लोगों के साथ फ्लाईओवर के नीचे रहती है। कभी कभार कोई दानी कंबल आदि दे जाता है। कड़ाके की ठंड में खुले में नींद नहीं आती। 

वहीं करीब छह महीने के बच्चे को गोद में लिए अपना नाम गीतिका बताने वाली महिला ने कहा कि वह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के रहने वाले हैं। गरीबी की वजह से रोजी-रोटी कमाने यहां आए हैं। गुब्बारे बनाते हैं और बेचते हैं। कोई सरकारी मदद उन्हें नहीं मिली। बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पाती। वहीं नाम खेमराज उर्फ खेमा बताने वाले व्यक्ति ने बताया कि गरीबी की वजह से वह फ्लाईओवर के नीचे जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।

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