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अफसरों की अंधेर नगरीः नियमों को हवा में उड़ा कर दे दिया 223 करोड़ रुपए का कर्ज

Tue, 19 May 2020 12:06 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 19 May 2020 12:06 PM IST
सार

जम्मू कश्मीर में सहकारी बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से एक ऐसी सोसायटी के नाम इतनी बड़ी रकम जारी कर दी गई, जो पंजीकृत ही नहीं है। हैरानी वाली बात तो ये है कि पूरे मामले में न तो पंजीकरण नंबर को प्रमाणित किया गया और न ही जमीन को गिरवीं रखा गया।

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Chairman of fake housing society in jammu kashmir arrested in debt scam 187 crore freeze
कोऑपरेटिव बैंक का कर्ज घोटाला मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने जम्मू-कश्मीर स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के कर्ज घोटाले में अवैध हाउसिंग सोसायटी के चेयरमैन हिलाल अहमद मीर को गिरफ्तार कर लिया है। श्रीनगर के मगरमल बाग निवासी आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

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इस बीच एसीबी ने 223 करोड़ रुपए के कर्ज घोटाले में से 187 करोड़ की रकम को बैंक खातों में फ्रीज कर दिया है। एसीबी ने प्रारंभिक जांच में पाया है कि सहकारी बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से एक ऐसी सोसायटी के नाम इतनी बड़ी रकम जारी की गई, जो पंजीकृत ही नहीं है। मामले में अब कुछ और गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
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एसीबी ने खुलासा किया है कि रिवर झेलम कोऑपरेटिव हाउस कॉलोनी शिवपोरा श्रीनगर नाम की अवैध सोसायटी के नाम 223 करोड़ का कर्ज जारी कर दिया गया। सोसायटी का रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटीज जम्मू-कश्मीर के पास पंजीकरण भी नहीं था। इस अवैध सोसायटी के मालिक ने 31 मार्च, 1994 को फर्जी पंजीकरण नंबर हासिल कर लिया था।


कर्ज के लिए आवेदन, विभाग के सचिव को किया गया। जिसमें कहा गया कि आवेदक श्रीनगर के बाहरी इलाके में 300 कनाल जमीन पर सैटेलाइट टाउनशिप बनाना चाहता है। इसके लिए उसे 300 करोड़ रुपये का ऋण दिया जाए। रजिस्ट्रार ने इसके लिए अनुशंसा कर मामला कोऑपरेटिव बैंक के पास भेज दिया। बैंक के चेयरमैन मोहम्मद शफी डार के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। पूरे मामले में न तो पंजीकरण नंबर को प्रमाणित किया गया और न ही जमीन को गिरवीं रखा गया।

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