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पाकिस्तानी गोलाबारी से ग्रामीणों को बचाने के लिए केंद्र ने बनाई नई रणनीति

Fri, 02 Jun 2017 02:38 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 02 Jun 2017 02:38 PM IST
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Center made new policy for preventing villagers from Pak firing
गृह मंत्रालय - फोटो : File Photo

पाकिस्तान की गोलाबारी से बार्डर और एलओसी के ग्रामीणों को बचाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नई रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है। अब ग्रामीणों को सीमा से दूर प्लाट के बजाय फ्लैट जैसे बंकर दिए जाएंगे।

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सीमा और एलओसी से पांच से दस किलोमीटर दूर पांच मरले के प्लाट की योजना पर सेना ने आपत्ति जताई है। सेना को आशंका है कि प्लाट आवंटन से बार्डर खाली हो सकता है, जिससे पाकिस्तान को फायदा हो सकता है। फिलहाल यह फाइल जम्मू कश्मीर सरकार के राजस्व विभाग के पास लंबित है।
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इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर एलओसी पर बंकर बनाने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया है। बार्डर और एलओसी के ग्रामीणों को अब फ्लैट जैसे सामुदायिक बंकरों में जगह दी जाएगी, जिसमें रसोई से लेकर शौचालय तक की आधुनिक सुविधाएं होंगी। 

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20 हजार बंकर बनाने की योजना

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सीमा पर बनाए जाएंगे बंकर - फोटो : डेमो पिक

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि बार्डर के ग्रामीणों के लिए कठुआ के हीरानगर में उनकी पहल पर जमीन की निशानदेही की गई थी। ग्रामीणों को पांच मरले का प्लाट दिया जाना तय हुआ। सेना के इनपुट के बाद यह मामला जम्मू कश्मीर सरकार के राजस्व विभाग के पास है।

इस बीच सामुदायिक बंकरों के निर्माण की गति तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। एलओसी और बार्डर पर 20 हजार बंकर बनाने की योजना है। एक बंकर पर पांच लाख रुपये से अधिक खर्च हो सकते हैं। प्रथम चरण के लिए भी लक्ष्य तय कर दिए गए हैं।

पाकिस्तान की ओर से एलओसी पर ज्यादा गोलाबारी हो रही है। भारतीय सेना के मुंहतोड़ जवाब से पाकिस्तानी सेना बौखलाई है। चूंकि पाकिस्तान इरादतन रिहायशी इलाकों को निशाना बनाता रहा है, इसलिए ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए बंकरों के निर्माण को जल्द पूरा किया जा रहा है, ताकि पाक गोलाबारी से विस्थापन की स्थिति में ग्रामीण बंकरों में ज्यादा समय से तक सुरक्षित रह सकें। इन बंकरों में उन्हें घर जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। तात्कालिक रूप से ग्रामीणों को शिविरों में जगह दी जाएगी। इन राहत शिविरों में उन्हें परिवार समेत रहने और खाने-पीने की सुविधा मिलेगी। 

अलगाववादियों से बातचीत का सवाल ही नहीं

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पीएमओ राज्यमंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह - फोटो : file photo

पीएमओ राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलगाववादियों से बातचीत का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। कश्मीर का मामला 1947 में ही हल किया जा चुका है। यह जरूर है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की नीतियों के कारण यह समस्या पैदा हुई। कश्मीर में अब अगर कोई मसला है तो वह पीओके का है, जिस पर पाकिस्तान ने गलत तरीके से कब्जा जमा रखा है। पाकिस्तान से पीओके को वापस लेना ही एजेंडे पर है। गौरतलब है अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने एक दिन पहले कहा था कि अलगाववादी धड़ा केंद्र सरकार से बातचीत नहीं करेगा। 

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