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सेवा पर्व का उत्सव गतिविधियों पर नहीं, परिणामों पर होना चाहिए : एलजी
Fri, 12 Sep 2025 02:29 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Fri, 12 Sep 2025 02:29 AM IST
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श्रीनगर। सेवा पर्व का उत्सव विकसित भारत और विकसित जम्मू-कश्मीर के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारा ध्यान प्रतीकात्मक गतिविधियों पर नहीं बल्कि परिणामों पर होना चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों को आदर्श के रूप में कार्य करना चाहिए और प्रयासों का नेतृत्व करना चाहिए। प्रत्येक विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गतिविधियां विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हों।
ये बातें एलजी मनोज सिन्हा ने कही। वह वीरवार को 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सेवा पर्व की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। एलजी ने विभागों को प्रमुख योजनाओं के कवरेज में कमियों की पहचान करने और उन्हें पूर्ण करने के लिए समर्पित प्रयास करने का निर्देश दिया। नशा मुक्ति, आपदा प्रबंधन जागरूकता अभियान और शिकायत निवारण के लिए विशेष शिविरों को सेवा पर्व गतिविधियों में शामिल करने पर जोर दिया।
एलजी मनोज सिन्हा ने विभागों को अपनी-अपनी निर्धारित गतिविधियों के लिए यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करने और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से उनकी निगरानी करने का निर्देश दिया। बोले, हमें युवा संसद जैसे मंचों के माध्यम से छात्रों को नागरिक जिम्मेदारियों और प्रमुख राष्ट्रीय एवं सामाजिक मुद्दों के बारे में शिक्षित करना चाहिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की राहत और उनकी चिंताओं का समाधान, लोगों के बीच स्वच्छता को बढ़ावा देना, एकल उपयोग प्लास्टिक पर अंकुश लगाना और वृद्धों, गरीबों और विशेष रूप से सक्षम लोगों का कल्याण भी हमारी नियोजित गतिविधियों का हिस्सा होना चाहिए।
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उन्होंने महात्मा गांधी पर वाद-विवाद और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित करने को कहा। कहा कि सेवा पर्व के मार्गदर्शक सिद्धांत जनसेवा, सामुदायिक भागीदारी और समावेशी शासन हैं ताकि समुदायों पर सार्थक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके। सेवा पर्व का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर आवाज़ सुनी जाए और समाज के हर वर्ग को विकास पहलों का लाभ मिले।
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ये बातें एलजी मनोज सिन्हा ने कही। वह वीरवार को 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सेवा पर्व की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। एलजी ने विभागों को प्रमुख योजनाओं के कवरेज में कमियों की पहचान करने और उन्हें पूर्ण करने के लिए समर्पित प्रयास करने का निर्देश दिया। नशा मुक्ति, आपदा प्रबंधन जागरूकता अभियान और शिकायत निवारण के लिए विशेष शिविरों को सेवा पर्व गतिविधियों में शामिल करने पर जोर दिया।
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एलजी मनोज सिन्हा ने विभागों को अपनी-अपनी निर्धारित गतिविधियों के लिए यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करने और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से उनकी निगरानी करने का निर्देश दिया। बोले, हमें युवा संसद जैसे मंचों के माध्यम से छात्रों को नागरिक जिम्मेदारियों और प्रमुख राष्ट्रीय एवं सामाजिक मुद्दों के बारे में शिक्षित करना चाहिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की राहत और उनकी चिंताओं का समाधान, लोगों के बीच स्वच्छता को बढ़ावा देना, एकल उपयोग प्लास्टिक पर अंकुश लगाना और वृद्धों, गरीबों और विशेष रूप से सक्षम लोगों का कल्याण भी हमारी नियोजित गतिविधियों का हिस्सा होना चाहिए।
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उन्होंने महात्मा गांधी पर वाद-विवाद और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित करने को कहा। कहा कि सेवा पर्व के मार्गदर्शक सिद्धांत जनसेवा, सामुदायिक भागीदारी और समावेशी शासन हैं ताकि समुदायों पर सार्थक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके। सेवा पर्व का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर आवाज़ सुनी जाए और समाज के हर वर्ग को विकास पहलों का लाभ मिले।