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Jammu News: सीएम की जान बचाने वाली अधिकारी को पदोन्नति नहीं
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जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) से मुख्यमंत्री की जान बचाने के लिए उग्र भीड़ को काबू में करने वाली महिला पुलिस अधिकारी को राहत नहीं मिली है। पुलिस अधिकारी ने पदोन्नति के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज करते हुए न्यायाधिकरण ने कहा कि उनके रिकॉर्ड में ऐसा कोई असाधारण कार्य नहीं पाया गया जो तय मानकों के अनुसार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के योग्य हो।
मामला 11 फरवरी 1997 का है। उधमपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री डाॅ. फारुक अब्दुल्ला की जनसभा के दौरान हिंसक भीड़ ने हमला करने की कोशिश की थी। मौके पर तैनात महिला अधिकारी और एक अन्य पुलिसकर्मी ने बहादुरी दिखाते हुए स्थिति पर काबू पा लिया। इस पर मुख्यमंत्री ने दोनों के लिए आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की सिफारिश की थी। हालांकि, प्रमोशन केवल पुरुष पुलिसकर्मी को मिला, जबकि महिला अधिकारी को नहीं दिया गया।
महिला अधिकारी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसे बाद में कैट को स्थानांतरित कर दिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता को कई मौकों पर नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र मिले हैं, लेकिन आतंकरोधी अभियानों में कोई विशिष्ट योगदान नहीं रहा।
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सरकार के वर्ष 2000 और 2007 के आदेशों के अनुसार, आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के लिए असाधारण और निरंतर प्रदर्शन आवश्यक है। इसी आधार पर कैट के न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने महिला अधिकारी की याचिका को खारिज कर दिया।
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मामला 11 फरवरी 1997 का है। उधमपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री डाॅ. फारुक अब्दुल्ला की जनसभा के दौरान हिंसक भीड़ ने हमला करने की कोशिश की थी। मौके पर तैनात महिला अधिकारी और एक अन्य पुलिसकर्मी ने बहादुरी दिखाते हुए स्थिति पर काबू पा लिया। इस पर मुख्यमंत्री ने दोनों के लिए आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की सिफारिश की थी। हालांकि, प्रमोशन केवल पुरुष पुलिसकर्मी को मिला, जबकि महिला अधिकारी को नहीं दिया गया।
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महिला अधिकारी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसे बाद में कैट को स्थानांतरित कर दिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता को कई मौकों पर नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र मिले हैं, लेकिन आतंकरोधी अभियानों में कोई विशिष्ट योगदान नहीं रहा।
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सरकार के वर्ष 2000 और 2007 के आदेशों के अनुसार, आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के लिए असाधारण और निरंतर प्रदर्शन आवश्यक है। इसी आधार पर कैट के न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने महिला अधिकारी की याचिका को खारिज कर दिया।