फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Carpet sold with fake GI tag, shopkeeper's registration cancelled

Jammu News: नकली जीआई टैग लगाकर बेचा कालीन, दुकानदार का पंजीकरण रद्द

विज्ञापन
Carpet sold with fake GI tag, shopkeeper's registration cancelled
श्रीनगर। पर्यटक से ठगी कर कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग की विश्वसनीयता को खतरे में डालना शिल्प विक्रेता को भारी पड़ गया। इस मामले में हस्तशिल्प और हथकरघा निदेशालय कश्मीर ने तंगमर्ग के शोरूम द कश्मीर आर्ट बाज़ार को काली सूची में डालकर उसका पंजीकरण रद्द कर दिया। शोरूम संचालक पर आरोप है कि उसने मशीन से बने कालीन को हाथ से बुने हुए कश्मीरी उत्पाद के रूप में एक पर्यटक को धोखे से 2.55 लाख रुपये में बेचने की कोशिश की थी।
विज्ञापन

निदेशक हस्तशिल्प एवं हथकरघा की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विक्रेता ने भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) द्वारा जारी आधिकारिक लेबल से मिलते-जुलते एक नकली क्यूआर लेबल का इस्तेमाल करके खरीदार को यह विश्वास दिलाया कि कालीन एक असली जीआई-प्रमाणित शिल्प है। इस मामले में एक औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया गया है और जीआई अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत आगे की कानूनी कार्यवाही की सिफारिश की गई है। विभाग की गुणवत्ता नियंत्रण शाखा की एक टीम तंगमर्ग के कोंचीपोरा पहुंची और शोरूम को काली सूची में डालने की प्रक्रिया पूरी की।
विज्ञापन

निदेशालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि पर्यटक सैयद फुरकान आलम ने आईआईसीटी श्रीनगर के निदेशक से शिकायत की थी कि उन्होंने कोंचीपोरा, तंगमर्ग स्थित द कश्मीर आर्ट बाज़ार से एक कालीन के लिए 25,000 रुपये का अग्रिम भुगतान किया था। उन्हें कालीन के 2.55 लाख रुपये देने थे। शोरूम ने आईआईसीटी प्रमाणन का दावा करते हुए एक प्रमाणपत्र और क्यूआर कोड प्रस्तुत किया। सत्यापन के बाद, आईआईसीटी ने पुष्टि की कि क्यूआर लेबल जाली था और उनके संस्थान द्वारा जारी नहीं किया गया था। मामला विभाग के गुणवत्ता नियंत्रण प्रभाग को भेज दिया गया, जिसने एक भौतिक निरीक्षण किया, कालीन जब्त किया और मालिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अपने जवाब में शोरूम मालिक ने धोखाधड़ी से इनकार किया और दावा किया कि ग्राहक ने यह बताने के बाद खरीदारी से इनकार कर दिया कि कालीन जीआई-प्रमाणित नहीं है। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत फोटोग्राफिक साक्ष्य और आईआईसीटी के निष्कर्षों से यह बात गलत साबित हुई, जिससे पुष्टि हुई कि नकली लेबल मशीन से बने कालीन पर चिपकाया गया था। विभाग ने जवाब की जांच करने पर इसे पूरी तरह से भ्रामक और असंतोषजनक पाया और निष्कर्ष निकाला कि यह कृत्य कश्मीर की जीआई शिल्प प्रतिष्ठा का फायदा उठाकर खरीदार को धोखा देने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास था।


निदेशक ने अपने आदेश में कहा कि विक्रेता ने जानबूझकर आईआईसीटी के मूल जीआई लेबल जैसा एक नकली क्यूआर लेबल बनाया और संबंधित पर्यटक को धोखा देने के लिए उसे मशीन से बने कालीन पर चिपका दिया। जम्मू-कश्मीर पर्यटन व्यापार पंजीकरण अधिनियम के उल्लंघन का हवाला देते हुए, निदेशालय ने विक्रेता को तुरंत काली सूची में डालने और उसका पंजीकरण रद्द करने का आदेश दिया। इसके अलावा कश्मीर आर्ट बाज़ार के मालिक के खिलाफ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पर्यटन प्रवर्तन, कश्मीर के कार्यालय में एक औपचारिक शिकायत दर्ज की जाए, ताकि नकली क्यूआर लेबल चिपकाने के लिए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed