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जम्मू में मूर्तिकला शिविर: कश्मीर के देवार पत्थर पर उकेरी जा रही आकृतियां, पॉलिश के बाद बिखेरेगा चमक
Fri, 15 Mar 2024 01:03 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Fri, 15 Mar 2024 01:03 PM IST
सार
देवार पत्थर पर सबसे अच्छी मूर्ति बनाई जाती है। इसकी विशेषता यह है जितना इसको छेनी से तोड़ेंगे उतना ही टूटा है, जिससे इसे आकार देने में मदद मिलती है। पॉलिश के बाद इसका स्वरूप काफी आकर्षक होता है।
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जम्मू में आयोजित मूर्तिकला शिविर
- फोटो : संवाद
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में मूर्तिकला को जिंदा रखने के अपने संकल्प बनाए रखने के मूर्तिकार पत्थर पर नक्काशी कर कला को नया आयाम दे रहे हैं। कश्मीर के मार्बल स्टोन देवार पर मूर्तिकार अपनी प्रतिभा को उकेर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति और भाषा अकादमी ने दस साल बाद मूर्तिकला शिविर का आयोजन किया है। इसमें जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों से मूर्तिकार भाग ले रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके मूर्तिकार भी हैं।
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शिविर में शामिल मूर्तिकार पत्थर में जान डालने का काम कर रहे हैं। हीरानगर के मूर्तिकार गणेश कुमार शर्मा को मूर्तिकारी में 40 साल का लंबा अनुभव है। उन्होंने कहा कि 1987 में पहले शिविर में भाग लिया था। मूर्तिकला का कार्य परिश्रम वाला है। कश्मीर के देवार पत्थर पर सबसे अच्छी मूर्ति बनाई जाती है। इसकी विशेषता यह है जितना इसको छेनी से तोड़ेंगे उतना ही टूटा है, जिससे इसे आकार देने में मदद मिलती है। पॉलिश के बाद इसका स्वरूप काफी आकर्षक होता है।
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मूर्तिकार जेएस बबली ने कहा कि दस साल बाद अकादमी ने यह पहल की है। देवार पत्थर मूर्तिकारी के लिए सबसे अच्छा है। कश्मीर में इस पत्थर का उपयोग घर बनने में किया जाता है। मूर्तिकला में काफी चीजों को देखा जाता है। पहले पत्थर को बैलेंस किया जाता है, जिसके बाद अपने विचार को इस पर उकेरा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में एक माह लग जाता है। बबली ने कहा कि इस तरह की पहल से मूर्तिकला से जुड़े कारीगरों को रोजगार मिलेगा।
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जम्मू विश्वविद्यालय के मूर्तिकला विभाग के लेक्चरर जसलीन सिंह ने कहा कि 15 साल से काम कर रहा हूं। मूर्तियां मार्बल, सेंड स्टोन और ग्रेनाइट में बनाई जाती हैं। कश्मीर का पत्थर देवार मूर्तिकला के काफी मुफीद है। कला आकार देने के लिए जब इसको पॉलिश किया जाता है तो काफी चमक देता है।
मूर्तिकार सुखबीर सिंह ने कहा कि 25 साल से मूर्तिकला का काम कर रहा हूं। ज्यादातर काम मिट्टी और लकड़ी पर करता हूं, लेकिन अब पत्थर पर भी इसे उकेर रहा हूं। पत्थर पर कोई भी आकार गढ़ने के लिए पहले उसे समझना पड़ता है। देवार पत्थर में रेत ज्यादा होती और इसमें कठोरपन कम होता है। इस पत्थर में फासिल होता है, जो इसकी विशेषता को बढ़ाता है।