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कश्मीर में लोकसभा उपचुनाव ने बढ़ाई महबूबा मुफ्ती की मुश्किलें
बृजेश कुमार सिंह,अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 11 Mar 2017 12:15 PM IST
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MEHBOOBA MUFTI
- फोटो : File Photo
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श्रीनगर और अनंतनाग लोकसभा सीट उपचुनाव ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और पीडीपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दोनों ही सीटें पार्टी के कब्जे में रही हैं और दोबारा इन सीटों पर कब्जा करना पार्टी के लिए नाक का सवाल बन गया है।
खासकर भाजपा से गठबंधन के बाद घाटी में हो रही आलोचनाओं के बाद यह स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद के निर्णय और पीडीपी-भाजपा गठबंधन की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है। सरकार चाहती थी कि उपचुनाव पंचायत चुनावों के बाद हों ताकि पंचायत चुनाव में मिली कामयाबी का फायदा उपचुनाव में पार्टी को मिल सके। साथ ही संगठन में मचे उथल पुथल को शांत करने का भी मौका मिल जाए।
पीडीपी में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में आए मुफ्ती के बेटे और महबूबा के भाई तसद्दुक मुफ्ती का अनंतनाग सीट से लड़ना तय माना जा रहा है। ऐसे में इस सीट पर जीत हासिल करना पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा क्योंकि दक्षिणी कश्मीर में पार्टी का जबर्दस्त वर्चस्व रहा है। महबूबा इस सीट से पिछले दो चुनाव में लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। कश्मीर हिंसा के बाद श्रीनगर से पीडीपी सांसद तारिक हमीद कर्रा ने पार्टी के निर्णयों से खफा होकर इस्तीफा दिया। इसके बाद महबूबा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज होकर बशारत बुखारी और मौलवी इमरान रजा अंसारी ने इस्तीफा दिया। बशारत तो मान गए हैं, लेकिन इमरान अंसारी ने अभी इस्तीफा वापस नहीं लिया है। बताया जाता है कि उमरा से लौटने के बाद पार्टी उन्हें भी मना लेगी। हाल के इन दोनों घटनाओं से माना जा रहा है कि पीडीपी में अंदरखाने गुटबाजी हावी है। पीडीपी के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों तथा संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ विधायकों में गुस्सा है।
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खासकर भाजपा से गठबंधन के बाद घाटी में हो रही आलोचनाओं के बाद यह स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद के निर्णय और पीडीपी-भाजपा गठबंधन की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है। सरकार चाहती थी कि उपचुनाव पंचायत चुनावों के बाद हों ताकि पंचायत चुनाव में मिली कामयाबी का फायदा उपचुनाव में पार्टी को मिल सके। साथ ही संगठन में मचे उथल पुथल को शांत करने का भी मौका मिल जाए।
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पीडीपी में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में आए मुफ्ती के बेटे और महबूबा के भाई तसद्दुक मुफ्ती का अनंतनाग सीट से लड़ना तय माना जा रहा है। ऐसे में इस सीट पर जीत हासिल करना पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा क्योंकि दक्षिणी कश्मीर में पार्टी का जबर्दस्त वर्चस्व रहा है। महबूबा इस सीट से पिछले दो चुनाव में लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। कश्मीर हिंसा के बाद श्रीनगर से पीडीपी सांसद तारिक हमीद कर्रा ने पार्टी के निर्णयों से खफा होकर इस्तीफा दिया। इसके बाद महबूबा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज होकर बशारत बुखारी और मौलवी इमरान रजा अंसारी ने इस्तीफा दिया। बशारत तो मान गए हैं, लेकिन इमरान अंसारी ने अभी इस्तीफा वापस नहीं लिया है। बताया जाता है कि उमरा से लौटने के बाद पार्टी उन्हें भी मना लेगी। हाल के इन दोनों घटनाओं से माना जा रहा है कि पीडीपी में अंदरखाने गुटबाजी हावी है। पीडीपी के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों तथा संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ विधायकों में गुस्सा है।
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पीडीपी रणनीतिकारों में मंथन
महबूबा मुफ्ती सईद
- फोटो : PTI
विपक्षी दल नेकां और कांग्रेस की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। पीडीपी को कश्मीरियों की भावनाओं से खिलवाड़ करने और युवाओं तथा हर वर्ग की अनदेखी किए जाने के सवाल उठाए जा रहे हैं। भाजपा के साथ गठबंधन पर भी सवाल किए जा रहे हैं।
इसे कश्मीर के साथ पीडीपी के विश्वासघात के रूप में लंबे समय से प्रचारित किया जा रहा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पीडीपी ने विपक्षियों को मात देते हुए घाटी की दोनों सीटों श्रीनगर और अनंतनाग पर कब्जा जमा लिया था। पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां के धाकड़ नेता डा. फारूक अब्दुल्ला तक को मात खानी पड़ी थी।
लोकसभा उपचुनाव की तिथि घोषित होते ही रियासत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पीडीपी के रणनीतिकारों ने वीरवार को बैठक कर चुनाव पर चर्चा की।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी उपाध्यक्ष सरताज मदनी, अब्दुल रहमान वीरी तथा दक्षिणी कश्मीर के विधायकों ने बैठक कर चुनाव को पक्ष में करने के उपायों पर बात की। साथ ही श्रीनगर सीट के लिए भी मंत्री अल्ताफ बुखारी व आसिया नक्काश से भी संगठन के पदाधिकारियों ने चर्चा की। कहा जा रहा है कि जल्द ही पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती इस संबंध में बैठक बुलाकर किला फतह करने की रणनीति तैयार कर सकती हैं।
इसे कश्मीर के साथ पीडीपी के विश्वासघात के रूप में लंबे समय से प्रचारित किया जा रहा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पीडीपी ने विपक्षियों को मात देते हुए घाटी की दोनों सीटों श्रीनगर और अनंतनाग पर कब्जा जमा लिया था। पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां के धाकड़ नेता डा. फारूक अब्दुल्ला तक को मात खानी पड़ी थी।
लोकसभा उपचुनाव की तिथि घोषित होते ही रियासत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पीडीपी के रणनीतिकारों ने वीरवार को बैठक कर चुनाव पर चर्चा की।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी उपाध्यक्ष सरताज मदनी, अब्दुल रहमान वीरी तथा दक्षिणी कश्मीर के विधायकों ने बैठक कर चुनाव को पक्ष में करने के उपायों पर बात की। साथ ही श्रीनगर सीट के लिए भी मंत्री अल्ताफ बुखारी व आसिया नक्काश से भी संगठन के पदाधिकारियों ने चर्चा की। कहा जा रहा है कि जल्द ही पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती इस संबंध में बैठक बुलाकर किला फतह करने की रणनीति तैयार कर सकती हैं।