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Jammu News: बजट प्रक्रिया से दूर रखने पर उद्योग जगत नाराज
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जम्मू। वित्तीय वर्ष के बजट से पहले उद्योग जगत से राय न लेने पर जम्मू संभाग के संगठन नाराज हैं। वीरवार को फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज की आपात बैठक हुई, जिसमें औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन वीरेंद्र जैन ने की।
बैठक में कहा कि बजट से पहले उद्योगों की समस्याओं और सुझावों पर चर्चा के लिए प्री बजट बैठक बुलाई जाती है लेकिन इस बार स्थानीय उद्योगों को प्रक्रिया से दूर रखा गया। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार के गठन के बाद संगठनों की ओर से व्यावहारिक प्रस्ताव दिए गए थे, लेकिन अब तक प्रभावी अमल नहीं हुआ। काराेबारियों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी से हस्तक्षेप की मांग की।
फेडरेशन ने सात प्रमुख मांगें उठाईं। इनमें कुल बजट का कम से कम एक फीसदी हिस्सा औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं के लिए रखने और अगले पांच वर्षों तक बिजली दरें स्थिर रखना प्रमुख है। इसके अलावा बिजली दरें वापस लेने, इकाइयों को बिजली माफी देने, औद्योगिक भूखंडों को फ्री होल्ड करने, पंजाब सरकार की ओर से गेहूं की खरीद पर लगाए गए मंडी कर की भरपाई और औद्योगिक क्षेत्रों के रखरखाव के लिए फंड उपलब्ध कराया जाए। फेडरेशन का कहना है कि मांगों पर समय रहते फैसला हुआ तो करीब दो लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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बैठक में कहा कि बजट से पहले उद्योगों की समस्याओं और सुझावों पर चर्चा के लिए प्री बजट बैठक बुलाई जाती है लेकिन इस बार स्थानीय उद्योगों को प्रक्रिया से दूर रखा गया। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार के गठन के बाद संगठनों की ओर से व्यावहारिक प्रस्ताव दिए गए थे, लेकिन अब तक प्रभावी अमल नहीं हुआ। काराेबारियों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी से हस्तक्षेप की मांग की।
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फेडरेशन ने सात प्रमुख मांगें उठाईं। इनमें कुल बजट का कम से कम एक फीसदी हिस्सा औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं के लिए रखने और अगले पांच वर्षों तक बिजली दरें स्थिर रखना प्रमुख है। इसके अलावा बिजली दरें वापस लेने, इकाइयों को बिजली माफी देने, औद्योगिक भूखंडों को फ्री होल्ड करने, पंजाब सरकार की ओर से गेहूं की खरीद पर लगाए गए मंडी कर की भरपाई और औद्योगिक क्षेत्रों के रखरखाव के लिए फंड उपलब्ध कराया जाए। फेडरेशन का कहना है कि मांगों पर समय रहते फैसला हुआ तो करीब दो लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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