Budget: जम्मू कश्मीर में बढ़ेंगी 400 तक DNB सीटें, डाक्टरों की कमी होगी पूरी, कैंसर संस्थान होंगे सुचारू
जम्मू-कश्मीर के बजट में सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। जम्मू और श्रीनगर में दो राज्य कैंसर संस्थान 2024 में पूरी तरह से काम करने लगेंगे।
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केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बजट में सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। जम्मू और श्रीनगर में दो राज्य कैंसर संस्थान 2024 में पूरी तरह से काम करने लगेंगे। अस्पतालों में डाक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए डीएनबी (डिप्लोमेट आफ नेशनल बोर्ड) सीटों को 400 तक बढ़ाने का प्रावधान रखा गया है, जिससे जिला स्तर पर चिकित्सा देखभाल मजबूत होगी। डिजिटल चिकित्सा की पहल में 1.35 करोड़ आबादी के लिए एबीएचए आईडी बनाकर स्वास्थ्य संबंधी रिकार्ड तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य कैंसर संस्थान जम्मू में ओपीडी के साथ कीमोथैरेपी सुविधा शुरू की गई है, लेकिन अभी रेडियोथैरेपी के लिए मरीजों को जीएमसी जम्मू में जाना पड़ रहा है। इसके अलावा कैंसर की सभी तरह की सर्जरी जीएमसी में ही की जा रही हैं, लेकिन इस साल अस्पताल के पूरी तरह से शुरू हो जाने पर कैंसर मरीजों को एक ही छत के नीचे सारी चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
गैर संचारी रोगों की श्रेणी में तेजी से बढ़ रहे मधुमेह और उच्च रक्तचाप मामलों की पहचान करने के लिए 30 से अधिक आयु वर्ग के लोगों की 100 प्रतिशत स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इसी तरह किडनी रोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 16 मौजूदा सुविधाओं और 10 नई स्वास्थ्य सुविधाओं से डायलिसिस सेवाओं को और सुदृढ़ बनाया जाएगा।
मनरेगा के तहत 400 लाख श्रम दिवस सृजित होंगे
बजट में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत 400 लाख श्रम दिवस सृजित किए जाने का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ हिमायत योजना के तहत करीब 7000 अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण पूरा किया जाएगा।
एनआरएलएम के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान 12000 अतिरिक्त स्वयं सेवी समहू (एसएचजी) बनाए जाएंगे। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत पंचायत राज संस्थान (पीआरआई) के सदस्यों को 2.60 लाख श्रम दिवस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 80 हजार घरों का निर्माण किया जाएगा।
स्वच्छ/कूड़ा और प्लास्टिक मुक्त बनने के लिए गांवों में ठोस/तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। वर्ष 2024-25 के दौरान एकीकृत वाटर शेड प्रबंधन (आईडब्ल्यूएमपी) के तहत 1800 निर्माण कार्यों को पूरा करने के साथ 26000 हेक्टेयर क्षेत्र को शोधित किया जाएगा।