बीएसएफ को महंगा पड़ गया पाकिस्तान पर भरोसा करना, आईजी के कहने के बाद भी ऐसी घटना बड़ी लापरवाही
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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को पाकिस्तान पर भरोसा करना महंगा पड़ गया। 4 जून को सरहद पर भारी गोलाबारी के बाद सुचेतगढ़ में ऑक्ट्राय पोस्ट पर दोनों तरफ के सेक्टर कमांडरों के बीच फ्लैग मीटिंग हुई तब बीएसएफ के आईजी राम अवतार ने साफ तौर पर जवानों को निर्देश दिए थे कि वह लोग पाकिस्तान पर विश्वास मत करें। पाक पर विश्वास करना एक लापरवाही साबित हुई है।
पाकिस्तान का बार-बार वादा करना और फिर मुकर जाना उसकी फितरत बन चुकी है। बीएसएफ के आईजी ने साफ तौर पर कहा था कि फ्लैग मीटिंग होने के बाद भी सरहद से जवानों की संख्या कम नहीं होगी। न ही बीएसएफ की हाई अलर्टनेस कम होगी। बावजूद इस तरह की घटना हुई। बीएसएफ के जवान पाक पर भरोसा करके रात के समय फेंसिंग के आगे काम करने जा रहे थे। लेकिन पाक ने इसका फायदा उठाया।
यह इस साल की दूसरी सबसे बड़ी सीज फायर तोड़ने की घटना है। वहीं पाकिस्तानी रेंजरों ने कायरता की हद पार की है। एक हफ्ते के बाद पाकिस्तान रेंजर पीर बाबा चमलियाल की मजार पर चादर चढ़ाने आने वाले थे, वहां आने से पहले खून की होली खेल दी। यहां बाबा चमलियाल की दो मजार हैं। एक पाकिस्तान और दूसरी हिंदुस्तान में है। हर साल यहां लगने वाले मेले में पाकिस्तानी रेंजर इस मजार पर आते हैं और पीर की मजार पर चादर चढ़ाते हैं। लेकिन इस साल चादर चढ़ाने से पहले यह करतूत कर दी।
हर चुप्पी के पीछे एक काली करतूत
पाकिस्तानी रेंजरों ने जब भी बीएसएफ के साथ फ्लैग मीटिंग की तो उसके बाद किसी न किसी बड़ी घटना को अंजाम दिया। गोलाबारी करने के बाद जब भी खामोशी हुई। उसकी आढ़ में कुछ न कुछ किया। पिछले तीन साल में पाकिस्तान ने चार बार सीमा पर सुरंग खोदकर आतंकियों को भेजने का प्रयास किया। इसमें अरनिया, रामगढ़, परगवाल और सांबा शामिल हैं। जबकि मीटिंग करने के बाद भी पाकिस्तान की ओर से स्नाइपर शूट आउट चलता ही रहा। पिछले तीन साल में स्नाइपर से सीमा पर एक दर्जन से अधिक जवान शहीद हो चुके हैं।