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राह हुई आसान: लेह-मनाली रूट पर बीआरओ ने रिकॉर्ड आठ दिनों में बनाया पुल, 110 फुट लंबा है व्हिस्की नाले पर बना ये ब्रिज
Tue, 20 Apr 2021 12:44 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/लेह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/लेह
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 20 Apr 2021 12:44 AM IST
सार
लद्दाख को हिमाचल से जोड़े रखने वाले 110 फुट लंबे लेह-सरचू पुल को बीआरओ ने रिकॉर्ड आठ दिनों में तैयार कर दिया।
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लेह-सरचू पुल
- फोटो : ani
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विस्तार
लद्दाख को हिमाचल से जोड़े रखने वाले 110 फुट लंबे लेह-सरचू पुल को बीआरओ ने रिकॉर्ड आठ दिनों में तैयार कर दिया। अत्यधिक बर्फबारी से पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। सामरिक महत्व के बैली पुल को बीआरओ ने न सिर्फ फिर से ठीक कर दिया, बल्कि लकड़ी की जगह स्टील का इस्तेमाल कर पुल को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बना दिया। इस पुल से लेह-मनाली रूट पर अब सेना के भारी वाहनों का काफिला आसानी से आवाजाही कर सकेगा।
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बीआरओ के अधिकारियों ने बताया कि व्हिसकी नाले पर बना 110 फुट लंबा पुल भारी हिमपात से जर्जर हो गया था। इलाके में पुल बेहद महत्व रखता है। इसे देखते हुए बीआरओ के प्रोजेक्ट हिमांक के तहत मौसम की चुनौतियों के बावजूद पुल का काम पांच से 12 अप्रैल के बीच युद्ध स्तर पर अंजाम दिया गया। पुल को बनाने के लिए खास रणनीति अपनाई गई। एक तरफ पहले से निर्मित पुल को तोड़ने का काम तो दूसरी ओर नए सिरे से निर्माण का काम चलाया गया। इस दौरान जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही को बाधित नहीं होने दिया गया। अधिकारी ने बताया कि रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया यह पुल पहले से कई गुना मजबूत हो गया है।
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50 टन वजन को आसानी से सहेगा पुल
व्हिस्की नाले पर बनाए गए नए पुल की क्षमता 50 टन तक कर दी गई है। इससे पूर्व ट्रक चालक इस पुल से गुजरते समय आशंकित रहते थे। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही के लिए अब यह पुल बेहतर विकल्प बन गया है।
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