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बॉर्डर लाइव: 'पाकिस्तानी स्नाइपरों की गोली नहीं, हमें अब हिसाब चाहिए'; लोग बोले- पाकिस्तान को जवाब देना जरूरी

Tue, 06 May 2025 03:00 PM IST
शाहरुख खान अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 06 May 2025 03:00 PM IST
सार

India Pakistan LOC Clash: एलओसी के पार से पाकिस्तान भले ही बार-बार गोलीबारी करे, लेकिन इस पार से हमेशा शांति की आवाज ही उठती रही है। हालांकि, इस बार ग्रामीणों का कहना है कि हमें अब हिसाब चाहिए, ताकि पाकिस्तान का दुस्साहस बंद हो।

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Border Tension in Kupwara Locals Demand Action Say No More Bullets We Want Justice
टीटवाल गांव में घर के बाहर बैठे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

LOC ceasefire violations: उत्तर कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा का टीटवाल गांव एक बार फिर सीमा पर तनाव का दंश झेल रहा है। किशनगंगा नदी के किनारे और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से महज 300-400 मीटर की दूरी पर स्थित यह गांव हमेशा से भारत-पाक रिश्तों का संवेदनशील प्रतिबिंब रहा है। 
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जब भी सरहद पर हलचल होती है, तो सबसे पहले उसका असर करीब 200 परिवारों वाले इसी गांव में महसूस होता है। एलओसी के पार से पाकिस्तान भले ही बार-बार गोलीबारी करे, लेकिन इस पार से हमेशा शांति की आवाज ही उठती रही है। हालांकि, इस बार ग्रामीणों का कहना है कि हमें अब हिसाब चाहिए, ताकि पाकिस्तान का दुस्साहस बंद हो।
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डर के साये में जिंदगी
हालिया पहलगाम आतंकी हमले के बाद से तनाव फिर बढ़ा है। स्थानीय निवासी एजाज खान बताते हैं, हमारे गांव की हर गतिविधि पाकिस्तान की नजरों में रहती है। स्नाइपर सीधे हमें निशाना बना सकते हैं। यह रोज का डर अब आदत बन गया है। 
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उनका कहना है कि हालात अब निर्णायक फैसले की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि जिस तरह पुलवामा हमले के बाद एक्शन लिया था, वैसी ही कार्रवाई फिर हो, ताकि पाकिस्तान दोबारा कोई दुस्साहस न करे।

युवाओं का हौसला बुलंद
टीटवाल के युवा भले ही बारूदी माहौल में पले-बढ़े हों, लेकिन उनके हौसले किसी सैनिक से कम नहीं। यहीं एक मैदान में क्रिकेट खेलते हुए फहीम कहते हैं कि बचपन दहशत में बीता है, लेकिन देश के लिए जज्बा कभी नहीं टूटा। हमें जरूरत पड़ी तो हम फौज के साथ खड़े रहेंगे। अब बार-बार डरना नहीं चाहते।

पर्यटन पर पड़ा असर
बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2023 में यहां 104 फीट ऊंचा तिरंगा ‘अजमत-ए-हिंद’ फहराया गया था, जिससे काफी पर्यटक आकर्षित हुए। कई युवाओं ने होमस्टे भी शुरू किया, लेकिन हाल के तनाव ने सब कुछ रोक दिया। स्थानीय निवासी मुदब्बिर बताते हैं, पर्यटन ही हमारी नई पहचान थी, लेकिन अब सब ठप है। बुकिंग कैंसिल हो रही हैं, जो हमारी आजीविका को प्रभावित कर रही हैं। अब बस दुआ है कि हालात जल्द सुधरें।

सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल : एक ही जगह गूंजती हैं घंटी, अजान और गुरबानी
टीटवाल धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक भी है। यहां एक ही परिसर में शारदा देवी का मंदिर, एक गुरुद्वारा और मस्जिद हैं। मंदिर की भूमि 2021 में स्थानीय मुस्लिमों ने दी थी, और 2023 में इसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था।

टीटवाल पुल: अब बस यादें बाकी
1931 में बना टीटवाल पुल भारत-पाक रिश्तों की सबसे भावनात्मक कड़ी था। इसे 2005 में पारिवारिक मिलन के लिए खोला गया था, लेकिन 2018 से बंद है। स्थानीय निवासी बशीर अहमद ने बताया कि यह पुल सिर्फ एक संरचना नहीं थी, यह दिलों को जोड़ने वाली डोर थी। हमारे सैकड़ों रिश्तेदार उस पार हैं, उनसे अब मिलना मुश्किल हो गया है।
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