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Pahagam Attack : सुरक्षित ठौर की तलाश में सीमावर्ती लोग, दिनभर काम के बाद बंकरों में रात बिता रहे ग्रामीण

Mon, 28 Apr 2025 05:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 28 Apr 2025 05:49 AM IST
सार

अरनिया, पुंछ, सांबा, हीरापुर ज्योड़ियां, आरएसपुरा समेत सीमा से सटे लगभग सभी गांवों में विशेष प्रकार की हलचल भी है। कोई रिश्तेदारों के घर में सुरक्षित ठौर तलाश रहा है, तो कहीं कुछ लोगो दिन भर के काम निपटाकर रात बंकर में बिताना शुरू कर चुके हैं।

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Border people are looking for a safe place, villagers are spending the night in bunkers after working all day
पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी के डर से हीरानगर में स्थानीय नागरिक बंकर में रात बिता रहे हैं। - फोटो : संवाद

विस्तार

पहलगाम हमले के बाद जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। अरनिया, पुंछ, सांबा, हीरापुर ज्योड़ियां, आरएसपुरा समेत सीमा से सटे लगभग सभी गांवों में विशेष प्रकार की हलचल भी है। कोई रिश्तेदारों के घर में सुरक्षित ठौर तलाश रहा है, तो कहीं कुछ लोगो दिन भर के काम निपटाकर रात बंकर में बिताना शुरू कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हमारा इलाका तो फायरिंग, मोर्टार शेल के हमले झेलने का आदी हो चुका है। मगर, सतर्कता तो जरूरी है।

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अरनिया में कई तरह के व्यावसायिक संस्थान चलाने वाले रंकज शर्मा माहौल देखते हुए अपने परिजनों के साथ बिश्नाह शिफ्ट हो गए हैं। अरनिया में केवल भारत-पाकिस्तान को लेकर चर्चा हो रही है। जब पाकिस्तान की तरफ से गोलीबारी होती है, तो अरनिया को सीमा से महज पांच किमी की दूरी पर होने का खामियाजा भुगतना पड़ता है। लोगों के मवेशी मारे जाते हैं। वे खुद बंकर और कैंपों में शेल्टर लेने के मजबूर हो जाते हैं। इसलिए सावधानी बरतते हुए वे पहले ही अपना ठिकाना बदल रहे हैं।
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जीएमसी के नोटिफिकेशन ने बढ़ाई लोगों की चिंता
अरनिया के मोहित शर्मा बताते हैं कि जीएमसी  यानी सरकारी मेिडकल कॉलेज के अलर्ट पर रहने संंबंधी नोटिफिकेशन ने चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल को अलर्ट मोड पर रहने और स्टाफ की छुटटी पर रोक लगाए जाने का क्या मतलब है? जाहिर है कि कुछ-न-कुछ जरूर बड़ा होने जा रहा है। इसी बात ने चिंता बढ़ा दी है।
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सड़क पर गेहूं काटने  की मशीनों की लाइन
इन दिनों अरनिया की तरफ जाने वाली सड़क पर गेहूं काटने वाली मशीनों की लाइन देखी जा सकती है। बॉर्डर पर स्थित गांवों के किसान अपनी गेहूं की फसल को काटने और समेटने में लगे हैं। 

  • बॉर्डर पर हालात बदलते हैं तो उसका खामियाजा किसानों को बड़े पैमाने पर उठाना पड़ता है। किसान विकास कहते हैं कि 10 प्रतिशत दाना कच्चा था, इसके बावजूद रिस्क लिया

हीरानगर : बंकरों में रोटी-पानी की व्यवस्था
हीरानगर सेक्टर में फिलहाल माहौल शांतिपूर्ण है, लेकिन लोगों में डर है कि कभी भी पाकिस्तान गोलीबारी कर सकता है। लोगों ने घरों में बने बंकरों को पूरी तरह से साफ कर लिया है और हवा, पानी, रोटी बनाने की व्यवस्था भी कर ली है। िदन में तो लोग रोजमर्रा के काम खुले में निपटा रहे हैं, लेकिन रात इन्ही बंकरों में गुजार रहे हैं। प्रदीप कुमार, गोपाल दास, बोध राज कहते हैं कि भगवान से यही प्रार्थना है कि फिर से ऐसे हालात न बनें कि पूरा दिन बंकरों में गुजरना पड़े।
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आरएसपुरा : पूरा ध्यान फसल को घर पहुंचाने पर
आरएसपुरा सीमांत गांव बासपुर के बुजुर्ग ओम प्रकाश का कहना है कि विभाजन के बाद पाकिस्तान ने जख्म देने के सिवाए कुछ नहीं किया। एक बार फिर हमारी सीमाएं तनाव में हैं। सीमावर्ती लोगों का जीवन खेती-बाड़ी और पशुपालन पर निर्भर करता है। हम सब इस वक्त पूरा समय फसलों को काटकर अनाज घरों में इकट्ठा करने में जुटे हैं।



सांबा : इतनी तेजी...बस 10 फीसदी कटाई रह गई बाकी
सांबा में किसान सोहन सिंह, हरी सिंह,गोपाल दास,सोम राज के अनुसार कि अधिकतर किसानों ने सीमा रेखा के निकट से अपनी गेहूं की फसल की कटाई कर ली है। एक दो दिनों में कटाई पूरी कर ली जाएगी। 

  • करीब दस प्रतिशत ही कटाई बची है। पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी की जाती है तो गेहूं की फसल जलकर राख हो जाएगी

ज्योड़ियां : प्रशासन की बैठकों का दौर जारी
ज्योड़ियां के सीमावर्ती इलाकों में आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के लिए क्षेत्र में कैंप बनाने के लिये प्रशासन की तरफ से बैठक कर ली गई है। सीमावर्ती गांव हमीरपुर, घिगड़ेयाल, बदोवाल, पलांवाला, पलातन, चपरेयाल, सैंथ, घरड़ आदि गावों के किसान बिना खौफ के फसल कटाई का काम समेटने में लगे हैं। सीमा पर भारतीय सेना पूरी तरह से मुस्तैद है। पहलगाम हमले के बाद से अब तक एलओसी पर पलांवाला सेक्टर में किसी भी तरह से सीजफायर का उल्लघंन नहीं हुआ है।

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