कश्मीर: BJP का मंत्रा ‘तू नहीं तो और सही’
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जम्मू-कश्मीर में पहली बार खुद की अगुवाई में सरकार बना कर इतिहास रचने की कोशिश में जुटी भाजपा ‘तू नहीं तो और सही’ का फार्मूला अपना रही है। वह पीडीपी को नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) तो एनसी को पीडीपी का भय दिखाने की रणनीति पर चल रही है। इसी कारण एनसी से बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ने के बावजूद भाजपा ने फिलहाल पीडीपी का अध्याय बंद नहीं किया है।
भाजपा ने अगर एनसी के साथ सरकार बनाई तो समर्थन के एवज में उसे उपमुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी जगह देगी। अगर एनसी के साथ खिचड़ी नहीं पकी तो पार्टी पीडीपी के समक्ष दोनों दलों की 3-3 साल के फार्मूले वाली सरकार का प्रस्ताव रखेगी।
हालांकि, पीडीपी के साथ सरकार बनाने के लिए भाजपा इस क्रम में पहला तीन साल खुद की अगुवाई वाली सरकार चाहेगी। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि फिलहाल एनसी का रुख सकारात्मक है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो पार्टी की अगुवाई वाली सरकार में अलगाववादी नेता सज्जाद लोन को अहम भूमिका मिलेगी।
पीडीपी और नेकां में घमासान
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि एनसी और पीडीपी की एक-दूसरे को सत्ता में आने से रोकने की चल रही जोर आजमाइश भाजपा के हित में है। एनसी किसी भी कीमत पर पीडीपी को और पीडीपी किसी भी कीमत पर एनसी को सत्ता से दूर रखना चाहती है।
ऐसे में भाजपा एनसी को लगातार संदेश दे रही है कि अगर उसने सरकार बनाने में सहयोग नहीं किया तो पार्टी पीडीपी के साथ जाने से गुरेज नहीं करेगी।
हालांकि, सच्चाई यह है कि भाजपा के सभी शीर्ष नेता एनसी के साथ सरकार बनाने के इच्छुक हैं। ऐसा इसलिए कि एनसी के साथ सरकार बनाने पर भाजपा बड़े भाई की भूमिका में होगी।