आतंकियों की रिहाई पर फैसले संचालन समिति लेगी
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मसर्रत आलम की रिहाई पर प्रदेश भाजपा ने तेवर तल्ख किए हैं। सोमवार को पार्टी विधायकों ने मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से मिलकर औपचारिक विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि मसर्रत की रिहाई बर्दाशत नहीं है।
गठबंधन की मर्यादा तोड़ने तथा एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाते हुए विधायकों ने सफाई भी मांगी। साथ ही दोबारा मसर्रत की गिरफ्तारी की मांग की। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि एक स्टीयरिंग कमेटी (संचालन समिति) बनेगी जिसमें दोनों दलों के चार-चार प्रतिनिधि शामिल होंगे। कमेटी आपसी समन्वय के आधार पर फैसले लेगी।
भाजपा महासचिव एवं विधायक राजीव जसरोटिया की अगुवाई में आठ विधायकों के शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री निवास पर सईद से मुलाकात कर भाजपा का पक्ष रखा। शिष्टमंडल ने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा मसर्रत की रिहाई के सख्त खिलाफ है, उसे पुन: गिरफ्तार किया जाए।
पीडीपी विधायकों के दुष्प्रचार पर आपत्ति जताई
मसर्रत की रिहाई पर भाजपा की रजामंदी संबंधी पीडीपी विधायकों के दुष्प्रचार पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई। भाजपा विधायकों ने पीडीपी पर गठबंधन की मर्यादा को भंग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का गठन न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) के तहत रियासत के लोगों की बेहतरी के लिए काम करने के लिए हुआ है।
सीएमपी के बाहर जाकर एकतरफा फैसलों को भाजपा बर्दाश्त नहीं करेगी। देश और राज्य की सुरक्षा और एकता के लिए मसर्रत के खिलाफ सभी लंबित एफआईआर की जांच कर जो चालान पेश नहीं हुए हैं, उन्हें पेश कर पुन: गिरफ्तारी की जाए।
भाजपा विधायकों में सत शर्मा, सतीश परिहार, दिलीप परिहार, नीलम लंगेह, गगन भगत, अजय नंदा और एमएलसी विबोध गुप्ता शामिल रहे। जसरोटिया का कहना है कि भाजपा को सत्ता का कोई लालच नहीं है। पीडीपी अगर भाजपा के ज्ञापन को गंभीरता से नहीं लेती है तो गठबंधन से अलग होने का विकल्प खुला हुआ है।