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Jammu News: असली पिता के आते ही नौकर, बेटे को लगे डंडे... खूब लगे ठहाके
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। विश्व रंगमंच दिवस पर नटरंग स्टूडियो थिएटर कच्ची छावनी में तौबा तौबा का मंचन किया गया। राजिंदर कुमार शर्मा लिखित और नीरज कांत निर्देशित तौबा तौबा हास्य से भरपूर है। इसकी प्रस्तुति के साथ ही तीन दिवसीय थिएटर महोत्सव का भी आगाज हुआ।
नाटक की शुरुआत अनोखे लाल के घर से होती है, जिन्होंने घर को रिहर्सल स्थान में बदल दिया है। वह नाटक के निर्देशक हैं। नाटक भी कुछ दिनों के भीतर होने वाला है। रिहर्सल जारी है। लेकिन इसको लेकर कोई गंभीर नहीं है। कलाकार अभ्यास के बजाए बहाने बनाते हैं। अब तनाव बढ़ गया है। अनोखे लाल नाटक के प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि कुछ भी ठीक नहीं हो रहा। रंगकर्मी डायलाॅग भूल रहे हैं। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो जाती है, जब निर्देशक को पता चलता है कि जो रंगकर्मी नायक के पिता की भूमिका निभा रहा था, वह अब अभिनय नहीं कर रहा है। वह निजी काम के लिए बाहर चला गया है। आखिर में नवनियुक्त नौकर को नाटक में पिता का किरदार निभाने के लिए तैयार करने का फैसला लिया जाता है, जो अनिच्छा से सहमत होता है। असली परेशानी तब आती है, जब अनोखे लाल के असली पिता आते हैं, जिनके सामने नौकर ने खुद को पिता के रूप में पेश किया। इस दौरान असली पिता ने दोनों को जमकर पीटा। इस पर खूब ठहाके लगे नाटक में विशाल शर्मा, आदेश धर, काननप्रीत कौर, चैतन्य शेखर और संकेत भगत की भूमिका सराहनीय रही।
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जम्मू। विश्व रंगमंच दिवस पर नटरंग स्टूडियो थिएटर कच्ची छावनी में तौबा तौबा का मंचन किया गया। राजिंदर कुमार शर्मा लिखित और नीरज कांत निर्देशित तौबा तौबा हास्य से भरपूर है। इसकी प्रस्तुति के साथ ही तीन दिवसीय थिएटर महोत्सव का भी आगाज हुआ।
नाटक की शुरुआत अनोखे लाल के घर से होती है, जिन्होंने घर को रिहर्सल स्थान में बदल दिया है। वह नाटक के निर्देशक हैं। नाटक भी कुछ दिनों के भीतर होने वाला है। रिहर्सल जारी है। लेकिन इसको लेकर कोई गंभीर नहीं है। कलाकार अभ्यास के बजाए बहाने बनाते हैं। अब तनाव बढ़ गया है। अनोखे लाल नाटक के प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि कुछ भी ठीक नहीं हो रहा। रंगकर्मी डायलाॅग भूल रहे हैं। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो जाती है, जब निर्देशक को पता चलता है कि जो रंगकर्मी नायक के पिता की भूमिका निभा रहा था, वह अब अभिनय नहीं कर रहा है। वह निजी काम के लिए बाहर चला गया है। आखिर में नवनियुक्त नौकर को नाटक में पिता का किरदार निभाने के लिए तैयार करने का फैसला लिया जाता है, जो अनिच्छा से सहमत होता है। असली परेशानी तब आती है, जब अनोखे लाल के असली पिता आते हैं, जिनके सामने नौकर ने खुद को पिता के रूप में पेश किया। इस दौरान असली पिता ने दोनों को जमकर पीटा। इस पर खूब ठहाके लगे नाटक में विशाल शर्मा, आदेश धर, काननप्रीत कौर, चैतन्य शेखर और संकेत भगत की भूमिका सराहनीय रही।
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