कश्मीर में अफस्पा में बदलाव की संभावना से सेना चिंतित
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जम्मू-कश्मीर से विवादित अफस्पा कानून को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाने की किसी भी कोशिश को लेकर सेना ने चिंता जाहिर की है। राज्य में भाजपा और पीडीपी की सरकार बनने जा रही है।
माना जा रहा है कि दोनों दलों के बीच इस कानून को आंशिक रूप से हटाने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बन गई है। सेना के एक अधिकारी का कहना है कि निश्चित तौर पर पिछले कुछ सालों में घुसपैठ में कमी आई है, लेकिन राज्य के कुछ हिस्सों में कट्टरवाद बढ़ा है।
सेना का मानना है कि अगर अफस्पा को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया जाता है तो इसकी आशंका है कि भविष्य में कट्टरवाद और बाद में हिंसा में बढ़ोतरी हो।
नई सरकार में कानून में आंशिक बदलाव की संभावना
अफस्पा हटाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ सेना के सरकार तक अपनी बात पहुंचाने को लेकर पूछे जाने पर अधिकारी ने बताया कि सेना प्रमुख पिछले कुछ सालों से लगातार सरकार तक सेना की चिंता पहुंचा रहे हैं।
राज्य में सरकार बनाने की जारी हालिया कोशिशों के बीच सेना के सरकार से संपर्क साधने को लेकर पूछे जाने पर अधिकारी का कहना था कि फीडबैक एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों से इस विवादित कानून को कश्मीर से हटाने की मांग के बीच सेना इसे हटाने के खिलाफ रही है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में पाकिस्तान से भारत में 120 घुसपैठिये आए।
यह संख्या वर्ष 2013 में घटकर 100 और 2014 में 60 हो गई। हालांकि, इस दौरान राज्य में सेना की गोली से मरने वाले आतंकियों की संख्या बढ़ी।