आतंकी की गोली से गई जान: बलिदान देकर कई जिंदगियां बचा गया फैंटम, बेसमेंट में छिपे आतंकियों को 10 मिनट में खोजा
उधमपुर, मेरठ, कश्मीर समेत देश के अलग-अलग क्षेत्रों में सेना के श्वान प्रशिक्षित किए जाते हैं। आतंकियों को हथियारों समेत तलाशने के लिए इनको प्रशिक्षण दिया जाता है। ये श्वान आतंकियों को कहीं भी छुपे होने पर ढूंढ निकालते हैं।
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विस्तार
शिव आसन मंदिर में छिपे आतंकी ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रहे थे। जवाबी कार्रवाई कर रहे सैन्य जवानों को समझ नहीं आ रहा था कि आतंकी मंदिर के किस कौने में छिपे हैं। फिर इन आतंकियों का पता लगाने के लिए सेना के असाल्ट श्वान फैंटम की एंट्री हुई। फैंटम मंदिर में घुसा। 10 मिनट में ही फैंटम ने मंदिर की बेसमेंट में छुपे एक आतंकी को देख लिया। देखते ही उस पर झपट पड़ा। आतंकी ने फैंटम पर गोलियां बरसाईं। इसमें वह घायल हो गया। फैंटम के हैंडलर को पता चल गया कि आतंकी बेसमेंट में छुपकर फायरिंग कर रहे हैं।
इसके बाद सेना को आतंकियों की लोकेशन पता चल गई। सेना ने बेसमेंट को निशाना बनाकर फायरिंग की और एक आतंकी वहीं ढेर कर दिया। अन्य बचे दो आतंकियों को पूरी रात घेरे रखा और अगले दिन सुबह होते ही इन्हें ड्रोन से देखकर ढेर कर दिया। ऐसे में फैंटम अपना बलिदान देकर कई जिंदगियां बचा गया। यदि फैंटम आतंकियों की सही लोकेशन न बताता तो बड़ा नुकसान हो सकता था। आतंकी भाग सकते थे। आपरेशन लंबा भी चल सकता था।
इनका शौर्य भी फैंटम जैसा था
कैंट
6 वर्ष की मादा श्वान कैंट वर्ष 2023 में 12 सितंबर को राजोरी जिले के नारियां में आतंकी मुठभेड़ में बलिदान हो गई। कैंट ने आतंकी मुठभेड़ में आतंकियों की सही लोकेशन बताई। आतंकी घनी झाड़ियों में छुपकर फायरिंग कर रहे थे। कैंट के सही लोकेशन बताने से एक आतंकी को ढेर किया गया।
एक्सल
31 जुलाई 2022 : बारामुला में सेना की आतंकियों से मुठभेड़ हुई। आतंकी एक मस्जिद में छुपे हुए थे। इनके बारे में सेना को पता नहीं चल पा रहा था। तभी 2 वर्ष के असाल्ट श्वान एक्सल को भेजा गया। एक्सल ने अपने हैंडलर को आतंकियों की सही लोकेशन बताई और इसकी मदद से आतंकी मारा गया। इस मुठभेड़ में एक गोली एक्सल को लग गई।
जूम
13 अक्तूबर 2022 : अनंतनाग के कोकरनाग में आतंकियों के साथ सेना की मुठभेड़ हुई। इस आपरेशन में सेना के 4 साल के श्वान जूम को उतारा गया। श्वान की निशानदेही पर सेना ने दो आतंकी मार गिराए, लेकिन इसमें जूम भी बलिदान हो गया। 24 घंटे अस्पताल में इलाज के बावजूद नहीं बचाया जा सका।
सिर्फ हथियार नहीं चला सकते, बाकी जवानों से कम नहीं श्वान
बता दें कि उधमपुर, मेरठ, कश्मीर समेत देश के अलग-अलग क्षेत्रों में सेना के श्वान प्रशिक्षित किए जाते हैं। आतंकियों को हथियारों समेत तलाशने के लिए इनको प्रशिक्षण दिया जाता है। ये श्वान आतंकियों को कहीं भी छुपे होने पर ढूंढ निकालते हैं। ये बेजुबान सिर्फ हथियार नहीं चला सकते, लेकिन इनका शौर्य जवानों से कम नहीं है।