बतौर मुख्यमंत्री मेरे पहले कार्यकाल का परदा गिरा: उमर
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चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तिथियों की घोषणा के तुरंत बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा, बतौर मुख्यमंत्री मेरे पहले कार्यकाल का परदा गिर गया। उमर ने लिखा कि यह मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है कि मुझे रियासत के लोगों की सेवा करने का अवसर मिला।
मैंने अपने कार्यकाल के दौरान पूरी ईमानदारी से काम किया और हमेशा कोशिश की कि लोगों की समस्याओं को हल किया जा सके। अब यह लोगों पर निर्भर है कि वे क्या फैसला करते हैं। उमर ने लिखा कि लोगों का फैसला ही अंतिम है, बाकी सब तो शोर है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि नेशनल कांफ्रेंस चाहती थी कि किसी का राजनीतिक पुनर्वास हो इससे पहले बाढ़ पीड़ितों का पुनर्वास किया जाए। पर चुनाव आयोग की सोच अलग है। उमर ने लिखा कि नेशनल कांफ्रेंस बाढ़ पीड़ितों के दुख दर्द पर राजनीति करने वाली पीडीपी सहित अन्य राजनीतिक दलों को अवाम के सामने बेनकाब करेगी। उमर ने लिखा कि अब चूंकि चुनाव आयोग ने चुनाव कराने की घोषणा कर ही दी है तो हम पूरे जोश के साथ चुनाव लड़ेंगे।
मोदी-शाह की जोड़ी का जादू इस बार चलेगा या नहीं
चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों का बिगुल बजा दिया है। जम्मू-कश्मीर में 25 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच पांच चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे। वोटों की गिनती 23 दिसंबर को होगी और उसी दिन नतीजे भी घोषित हो जाएंगे। माना जा रहा है कि ये चुनाव एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के जादू की परीक्षा लेंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त वी.एस.संपत की अगुवाई में पूर्ण चुनाव आयोग ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने की घोषणा कर दी। चुनावी तारीखों की घोषणा करते ही तत्काल प्रभाव से आचार संहिता को भी लागू कर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ की वजह से चुनाव को आगे खिसकाने की अटकलों को विराम देते हुए चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि वह राज्य में चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। आयोग ने जम्मू-कश्मीर के दुर्गम इलाकों और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए पांच चरणों की लंबी प्रक्रिया में चुनाव कराने का फैसला किया है।