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Jammu News: अमरनाथ यात्रा के लिए श्रीराम मंदिर में पहुंचे 400 साधु-संत
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जम्मू। श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू में साधु-संतों का आना जारी है। इससे मंदिरों के शहर में मंत्र और भक्तिमय माहौल बन गया है। अब तक 400 साधु-संत जम्मू के श्रीराम मंदिर में पहुंच चुके हैं, जिनके खाने-पीने और ठहरने के इंतजाम के साथ सुरक्षा पुख्ता कर दी गई है। कई साधु-संत अकेले तो कई शिष्याें के साथ पधारे हैं। कई बाबा ऐसे हैं, जो चल नहीं सकते, लेकिन बाबा बर्फानी के दर्शन करने की इच्छा प्रबल है। श्रीराम मंदिर के महंत रामेश्वर दास ने बताया कि यहां 74 साल के संत पहुंचे हैं, जिनका कहना है कि बाबा अमरनाथ यात्रा पर जाना चाहते हैं और उन्हें अनुमति दी जाए। महंत ने कहा कि मंदिर परिसर में 2000 साधु-संतों को ठहराने का प्रबंध है। यहां लगाने के लिए नए कूलर और रोटी बनाने की मशीन भी मंगवा ली है।
ये बाबा हैं हठयोगी
श्रीराम मंदिर में पहुंचे कठिया बाबा के नाम से जाने जाने वाले एक संत ने 20 साल से अपनी कमर पर 6.5 किलो की लकड़ी बांधी हुई है। उनका कहना है कि यह सब उन्होंने इसलिए किया है, ताकि ध्यान खाने-पीने, सोने या किसी और चीज में न भटके। बस मैं सिर्फ भगवान की भक्ति में लीन रहूं। इन हठयोगी बाबा का नाम मनोहर लाल (64) और जन्मस्थान वृंदावन है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह फौज में भर्ती हुए, लेकिन नौकरी छोड़ दी और साधु बन गए। उनके अनुसार उनको भोजन मिले तो सही, नहीं मिले तो भी खाना नहीं मांगता। मेरे बच्चों ने कभी विरोध नहीं किया कि मैं ऐसा क्यों बन गया हूं। संवाद
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ये बाबा हैं हठयोगी
श्रीराम मंदिर में पहुंचे कठिया बाबा के नाम से जाने जाने वाले एक संत ने 20 साल से अपनी कमर पर 6.5 किलो की लकड़ी बांधी हुई है। उनका कहना है कि यह सब उन्होंने इसलिए किया है, ताकि ध्यान खाने-पीने, सोने या किसी और चीज में न भटके। बस मैं सिर्फ भगवान की भक्ति में लीन रहूं। इन हठयोगी बाबा का नाम मनोहर लाल (64) और जन्मस्थान वृंदावन है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह फौज में भर्ती हुए, लेकिन नौकरी छोड़ दी और साधु बन गए। उनके अनुसार उनको भोजन मिले तो सही, नहीं मिले तो भी खाना नहीं मांगता। मेरे बच्चों ने कभी विरोध नहीं किया कि मैं ऐसा क्यों बन गया हूं। संवाद
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