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Jammu News: बाबा बर्फानी के दर्शन से पहले परीक्षा, फिर मिलती है आध्यात्मिक तृप्ति
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- श्रद्धालु बोले- यात्रा कठिन, व्यवस्थाओं ने बढ़ाया भरोसा, दर्शन के बाद हर कष्ट हो जाता है छोटा
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। बाबा अमरनाथ के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान जरूर है लेकिन उससे कहीं अधिक संतोष और आस्था की चमक दिख रही है। गुजरात, कोलकाता और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा में लंबी कतारें, टोकन के लिए इंतजार और कठिन चढ़ाई जैसी चुनौतियां आज भी हैं लेकिन बाबा बर्फानी के दर्शन के बाद हर कष्ट छोटा हो जाता है।
श्रद्धालुओं ने बताया कि यात्रा में धैर्य की सबसे अधिक जरूरत होती है। कई लोगों को टोकन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। बावजूद इसके उनका कहना है कि यह भी यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने प्रशासन से पंजीकरण और टोकन काउंटर बढ़ाने की मांग भी की।
दर्शन कर लौटे उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के भगवान शुक्ल, सुमित कुड़ासन व सुमित तिवारी ने अन्य साथियों के साथ बालटाल मार्ग में हुए बदलावों की सराहना की। बताया कि पहले जहां रास्तों पर डर बना रहता था। अब चौड़े ट्रैक, सुरक्षा रेलिंग, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और जगह-जगह लंगर यात्रा को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित व सुविधाजनक बना रहे हैं। अब बालटाल बेस कैंप किसी छोटे शहर जैसा महसूस होता है। रात में रोशनी, सुरक्षा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। संत समाज से जुड़े कोलकाता के मनजीत भगत ने बताया कि अमरनाथ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। अलग-अलग राज्यों से आए लोग एक-दूसरे के साथ भोजन पकाते हैं। सहयोग करते हैं और पूरी यात्रा परिवार की तरह बिताते हैं।
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यात्रा से लाैटे खंडवा (मध्य प्रदेश) के रहने वाले रमेश दास का कहना है कि अमरनाथ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता है, जहां कठिनाइयों के बीच सेवा, सहयोग और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यात्रा में कुछ कठिनाइयां जरूर हैं लेकिन व्यवस्थाओं में आए बदलाव ने सफर को पहले से आसान बनाया है। बाबा बर्फानी के दर्शन के बाद हर परेशानी छोटी लगने लगती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। बाबा अमरनाथ के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान जरूर है लेकिन उससे कहीं अधिक संतोष और आस्था की चमक दिख रही है। गुजरात, कोलकाता और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा में लंबी कतारें, टोकन के लिए इंतजार और कठिन चढ़ाई जैसी चुनौतियां आज भी हैं लेकिन बाबा बर्फानी के दर्शन के बाद हर कष्ट छोटा हो जाता है।
श्रद्धालुओं ने बताया कि यात्रा में धैर्य की सबसे अधिक जरूरत होती है। कई लोगों को टोकन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। बावजूद इसके उनका कहना है कि यह भी यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने प्रशासन से पंजीकरण और टोकन काउंटर बढ़ाने की मांग भी की।
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दर्शन कर लौटे उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के भगवान शुक्ल, सुमित कुड़ासन व सुमित तिवारी ने अन्य साथियों के साथ बालटाल मार्ग में हुए बदलावों की सराहना की। बताया कि पहले जहां रास्तों पर डर बना रहता था। अब चौड़े ट्रैक, सुरक्षा रेलिंग, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और जगह-जगह लंगर यात्रा को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित व सुविधाजनक बना रहे हैं। अब बालटाल बेस कैंप किसी छोटे शहर जैसा महसूस होता है। रात में रोशनी, सुरक्षा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। संत समाज से जुड़े कोलकाता के मनजीत भगत ने बताया कि अमरनाथ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। अलग-अलग राज्यों से आए लोग एक-दूसरे के साथ भोजन पकाते हैं। सहयोग करते हैं और पूरी यात्रा परिवार की तरह बिताते हैं।
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यात्रा से लाैटे खंडवा (मध्य प्रदेश) के रहने वाले रमेश दास का कहना है कि अमरनाथ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता है, जहां कठिनाइयों के बीच सेवा, सहयोग और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यात्रा में कुछ कठिनाइयां जरूर हैं लेकिन व्यवस्थाओं में आए बदलाव ने सफर को पहले से आसान बनाया है। बाबा बर्फानी के दर्शन के बाद हर परेशानी छोटी लगने लगती है।