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Amar Ujala Samvad: पैरों को हाथ बनाने वाली विश्व नंबर एक पैरा तीरंदाज शीतल देवी बोलीं- हर कठिनाई को वरदान समझा
Fri, 01 Dec 2023 06:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 01 Dec 2023 06:15 AM IST
सार
बचपन में यह भी कहा गया कि इसके तो दोनों हाथ नहीं हैं, ये कुछ नहीं कर पाएगी, लेकिन उसी शीतल ने अपने जज्बे से दुनिया को अपनी ओर झुका लिया।
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अमर उजाला संवाद में शीतल देवी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जन्म से ही दोनों बाजू नहीं होने के चलते पैरों को ही अपने हाथ बनाने वाली शीतल देवी ने जिंदगी की हर कठिनाई को वरदान समझकर अपनाया। बचपन में यह भी कहा गया कि इसके तो दोनों हाथ नहीं हैं, ये कुछ नहीं कर पाएगी, लेकिन उसी शीतल ने अपने जज्बे से दुनिया को अपनी ओर झुका लिया।
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एक समय वह था जब माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड अकादमी में उनसे धनुष नहीं संभाला जा रहा था। शीतल टूट सी गई थीं। उनके मन में यही था कि, मुझसे नहीं हो पाएगा, लेकिन गुरु के शब्दों ने उनमें ऐसी प्रेरणा भरी की उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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माता-पिता ने कभी नहीं सोचा बेटी कुछ नहीं कर पाएगी
शीतल के पिता मान सिंह व मां शक्ति देवी भी कार्यक्रम में मौजूूद थीं। शीतल बताती हैं कि उनके मम्मी पापा ने कभी नहीं सोचा कि बेटी कुछ नहीं कर पाएगी। लोग कहते थे कि शीतल के हाथ नहीं हैं ये कुछ नहीं कर पाएगी, अगर किसी को कुछ समस्या है तो उसमें कुछ पाने का भी हौसला होता है।
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लगता है स्टार बन गई हूं
पहले उनके तीर निशाने पर नहीं लगे, लेकिन बाद में जब तीर निशाने पर लगने लगे तो उनमें हौसला आया। उनका आत्मविश्वास राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत जीतकर बढ़ा। शीतल कहती हैं कि यहां से मुझे लगा कि उन्हें और मेहनत करनी है।
बचपन में पैरों से चलाती थीं धनुष
शीतल बताती हैं कि पहले वह किश्तवाड़ में पड़ते गांव लोईधार में दोस्तों के साथ फुटबाल खेलती थी और लकड़ी का धनुष बनाकर उसे पैरों से चलाती थीं, उन्हें नहीं मालूम था कि बाद में यही खेल उनकी जिंदगी बन जाएगा।