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आतंक का साया हटा तो छाए मेधावी: लिखी सफलता की नई इबारत, सम्मान मिला, तस्वीरें खिंची, चेहरे खिले; गूंजी तालियां
Tue, 23 Jun 2026 03:20 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 23 Jun 2026 03:20 PM IST
सार
बंदूक के साये और चुनौतियों के आगे घुटने टेकने के बजाय इन मेधावियों ने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और अपने सपनों को एक नई और सुरक्षित उड़ान दी है।
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Amar Ujala Medhavi Samman
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एक दौर था जब शोपियां, कुपवाड़ा, बांदीपोरा और अनंतनाग के कई गांवों में सुबह की शुरुआत स्कूल की घंटी से नहीं बल्कि गोलियों की आवाज और बंद के एलान से होती थी। आतंकियों के डर से स्कूलों के दरवाजे बंद हो जाते थे। महीनों ताले लटके रहते थे। बच्चों के सपनों का पौधा बड़ा होने से पहले ही मुरझा जाता था। बचपन किताबों से ज्यादा अनिश्चितता, खौफ और बंदिशों के बीच गुजरता था। अब हालात सामान्य हुए तो इन्हीं बच्चों ने अपनी उम्मीदों के दीये से घाटी को रोशन कर दिया है।
10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में मेरिट सूची में अपना नाम दर्ज कराकर इन होनहारों ने यह दिखा दिया कि उनके हौसले भय से कहीं ज्यादा मजबूत हैं। यह केवल अच्छे अंकों की कहानी नहीं बल्कि उस बदलाव की दास्तान है जिसमें बारूद की गंध पर किताबों की खुशबू भारी पड़ी है।
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10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में मेरिट सूची में अपना नाम दर्ज कराकर इन होनहारों ने यह दिखा दिया कि उनके हौसले भय से कहीं ज्यादा मजबूत हैं। यह केवल अच्छे अंकों की कहानी नहीं बल्कि उस बदलाव की दास्तान है जिसमें बारूद की गंध पर किताबों की खुशबू भारी पड़ी है।
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बंदूक के साये और चुनौतियों के आगे घुटने टेकने के बजाय इन मेधावियों ने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और अपने सपनों को एक नई और सुरक्षित उड़ान दी है।
सम्मान मिला, तस्वीरें खिंचीं, चेहरे खिले और गूंजी तालियां
कुपवाड़ा के मीरनाग के मोहम्मद इकलास बानी ने 12वीं कक्षा के साइंस स्ट्रीम में 99.6 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। बताया कि जब उनकी बहन ने नीट क्यालिफाई किया तब उन्होंने साइंस स्ट्रीम चुना। कहते हैं कि मौजूदा और पुराने दौर में जमीन-आसमान का अंतर है। जब हालात सामान्य होते हैं तो चीजें बेहतर लगती हैं। आज कश्मीर का युवा बेहतर माहौल में पढ़-लिखकर विकसित भारत में सहभागी बनना चाहता है।
कुपवाड़ा के मीरनाग के मोहम्मद इकलास बानी ने 12वीं कक्षा के साइंस स्ट्रीम में 99.6 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। बताया कि जब उनकी बहन ने नीट क्यालिफाई किया तब उन्होंने साइंस स्ट्रीम चुना। कहते हैं कि मौजूदा और पुराने दौर में जमीन-आसमान का अंतर है। जब हालात सामान्य होते हैं तो चीजें बेहतर लगती हैं। आज कश्मीर का युवा बेहतर माहौल में पढ़-लिखकर विकसित भारत में सहभागी बनना चाहता है।
लोलाब, कुपवाड़ा के तौकीर तारीख बताते हैं कि आतंकवाद का सबसे अधिक मानसिक प्रभाव मेरे जैसे सैकड़ों छात्रों पर पड़ा है। पढ़ाई में लंबे अंतराल के बावजूद ध्यान बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इन परिस्थितियों को दरकिनार कर मैंने मेहनत जारी रखी और 12वीं कक्षा में 99 प्रतिशत अंक हासिल किए।
ये कभी न भूलने वाला यादगार पल
अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह में टॉपरों को मंच पर बुलाया गया तो पूरा माहौल उत्साह और उमंग से सराबोर हो उठा। उपराज्यपाल के हाथों पहली बार मिले इस सम्मान से बच्चों के चेहरों पर कामयाबी की चमक और भविष्य के लिए नई उड़ान का हौसला साफ नजर आ रहा था।
अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह में टॉपरों को मंच पर बुलाया गया तो पूरा माहौल उत्साह और उमंग से सराबोर हो उठा। उपराज्यपाल के हाथों पहली बार मिले इस सम्मान से बच्चों के चेहरों पर कामयाबी की चमक और भविष्य के लिए नई उड़ान का हौसला साफ नजर आ रहा था।
बांदीपोरा, कुपवाड़ा, बारामुला, शोपियां और सुदूर गुरेज घाटी जैसे दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे इन विद्यार्थियों में उपराज्यपाल के साथ मंच साझा करने व फोटो खिंचवाने और इस पल को यादगार बनाने की अद्भुत होड़ दिखी। उपराज्यपाल ने बच्चों से बातचीत की और उनका हौसला भी बढ़ाया।
एलजी के स्नेह ने बच्चों के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। यह क्षण माता-पिता के लिए भी सबसे बड़ी पूंजी बन गया। लाडलों को इतने बड़े मंच पर सम्मानित होते देख कई माता-पिता की आंखें गर्व व खुशी से नम हो गई। वे इस ऐतिहासिक पल को हमेशा के लिए सहेजने के लिए अपने मोबाइल कैमरों से लगातार तस्वीरें और वीडियो बनाते रहे।
पता नहीं रहता था कब और कितने महीने स्कूलों में लटका रहेगा ताला
शोपियां जिले के अजहर अशरफ ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99.2 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। वे बताते हैं कि छठीं कक्षा तक उनकी पढ़ाई प्रभावित रही। कई बार महीनों तक स्कूल बंद रहे। हालात सुधरने के बाद शिक्षा व्यवस्था बेहतर हुई।
शोपियां जिले के अजहर अशरफ ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99.2 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। वे बताते हैं कि छठीं कक्षा तक उनकी पढ़ाई प्रभावित रही। कई बार महीनों तक स्कूल बंद रहे। हालात सुधरने के बाद शिक्षा व्यवस्था बेहतर हुई।
शोपियां के तुर्कांगम के फहीम मोहम्मद ने 12वीं में 99 प्रतिशत अंक पाए। उन्होंने कहा, सत्र के शुरुआती छह महीने स्कूल में शिक्षक नहीं थे। बाद में दो की नियुक्ति हुई। 2019 से पहले स्कूल बंद रहते थे तो पढ़ाई की लव टूट जाती थी। मैं छोटा था लेकिन वह बुरा दौर आज भी याद आता है।