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#हिंदीहैंहम: शिक्षकों और छात्रों ने कहा- हिंदी के प्रोत्साहन के लिए घर से करनी होगी शुरुआत
Fri, 28 Aug 2020 10:30 AM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 28 Aug 2020 10:30 AM IST
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हिंदी के उत्थान के लिए शिक्षकों और छात्रों ने प्रकट की राय
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षकों और छात्रों का कहना है कि हिंदी हमारे भाव और विचारों को बड़ी ही सरलता से व्यक्त करती है। हिंदी भाषा के प्रोत्साहन के लिए सामाज को अपनी सोच बदलनी ही होगी। अंग्रेजी भाषा के गुणगान और वर्चस्व के बीच हिंदी को जीवंत रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। हिंदी के उत्थान के लिए हमें अपने घर से ही शुरुआत करनी होगी। मातृ भाषा के साथ हिंदी के प्रति बच्चों को आकर्षित करना होगा। इसकी शुरुआत स्कूल स्तर से होनी चाहिए।
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हिंदी भाषा को लेकर युवाओं में भ्रम है कि यह कठिन भाषा है। इसे जागरूकता के जरिए दूर किया जा सकता है। वहीं समाज में भी हिंदी को अंग्रेजी भाषा के मुकाबले कम आंका जाता है। हिंदी भाषा में हासिल उपलब्धि को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती। हिंदी भाषा के प्रोत्साहन के लिए हर स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। -नरदीप कौर कामरा, पीएचडी स्कॉलर हिंदी विभाग, जम्मू विश्वविद्यालय
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हिंदी की उपेक्षा हमारे घर से शुरू हो जाती है। कहते हैं कि बच्चे का पहला स्कूल उसका परिवार होता है, लेकिन आज परिवार में बच्चों को हिंदी की बजाय अंग्रेजी भाषा सिखाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। आधुनिकीकरण के इस दौर में अभिभावक अपने बच्चों को हिंदी की बजाय अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने पर जोर देते हैं, लेकिन इसके कारण बच्चें अपनी राष्ट्र भाषा से दूर होते जा रहे हैं। इस और हमें ध्यान देने की जरूरत है। हिंदी सरलता से समझ आने वाली भाषा है, जिसमें हम अपने विचारों को सहज रूप से अभिव्यक्त कर सकते है। ऐसे में इसके प्रोत्साहन के लिए हमें अधिक प्रयास करने चाहिए। -पूजा, पीएचडी छात्रा
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हिंदी को बढ़ावा देने के लिए स्कूल स्तर पर काम करना होगा। आज बच्चों पर अंग्रेजी भाषा सीखने का दबाव है, अभिभावक भी बच्चों के साथ अंग्रेजी में बात करते हैं। हिंदी बोलने वाले बच्चे भी बीच-बीच में अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, इससे अंग्रेजी का प्रभाव बढ़ रहा है। ज्यादातर नौकरियों में अंग्रेजी भाषा जानने वालों को तवज्जो दी जाती है। इससे हिंदी भाषा का ज्ञान रखने वाले बच्चों में हीन भावना आने लगती है। स्कूली स्तर से ही हमें समान रूप से अंग्रेजी और हिंदी भाषा पर जोर देने की जरूरत है। -डॉ. निशा जम्वाल, पूर्व अध्यापक दूरस्थ शिक्षा निदेशालय