Akhnoor Encounter : आकाश की आंखों देखी, पंजाबी में बात कर रहे थे आतंकी; जूता देख पता चला... ये नहीं आर्मी वाले
'वे लोग पूरी तरह से आर्मी की वर्दी में थे। कंधों पर बैग टंगे हुए थे। पूरे शरीर पर सामान बांध रखा था। पहले तो लगा कि आर्मी वाले हैं। लेकिन उनके जूते काले रंग के नहीं थे। जूतों का रंग बुरा था। जूते वैसे भी नहीं लग रहे थे।'
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आतंकियों द्वारा बंधक बनाए गए तीन छात्रों में से एक आकाश ने आंखों देखी बताई। आकाश का कहना है कि हम तीन थे। साथ में ही ट्यूशन पढ़ने जा रहे थे। मैं पानी पीने के लिए रुक गया। बाकी दो मंदिर परिसर में चले गए। कुछ देर बाद मैं भी मंदिर पहुंचा। अभी गेट से प्रवेश ही किया। सामने देखा कि आर्मी वर्दी में तीन लोग खड़े हैं। इनके पास मेरे साथ आए दोनों साथी भी थे। वे आपस में पंजाबी में बात कर रहे थे। मेरे साथियों से मोबाइल फोन मांग रहे थे। इतने में मैं और वे लोग आमने-सामने आ गए। मैं कुछ देर खड़ा रहा। वे मेरी तरफ देखकर मेरे साथियों से बात करते रहे। कुछ देर बाद मुझसे भी उन्होंने पंजाबी में बात की। मोबाइल फोन मांगा। मैंने भी मना कर दिया। उसी वक्त उन लोगों ने मेरे दोनों साथियों को भगा दिया और मुझे भी वहां से चले जाने को कहा। हम तीनों वहां से आ गए।
वे लोग पूरी तरह से आर्मी की वर्दी में थे। कंधों पर बैग टंगे हुए थे। पूरे शरीर पर सामान बांध रखा था। पहले तो लगा कि आर्मी वाले हैं। लेकिन उनके जूते काले रंग के नहीं थे। जूतों का रंग बुरा था। जूते वैसे भी नहीं लग रहे थे। जैसे आर्मी वाले पहनते हैं। बस यहीं से लग गया कि ये लोग आर्मी वाले नहीं। बल्कि आतंकी हैं। इसके बाद हमने इसकी जानकारी अपने घर में दी। घर वालों ने पास में मौजूद सेना को दी।
20 से 22 बच्चे पढ़ने जाते हैं ट्यूशन
इन बच्चों को शिक्षक मनोज कुमार मंदिर परिसर में ट्यूशन पढ़ाते हैं। 20 से 22 बच्चे आते हैं। शिक्षक का भी कहना है कि वह जब मंदिर परिसर की तरफ जा रहे थे। बाहर से देख लिया था कि कुछ लोग अंदर सेना की वर्दी में हैं। उनका हाव-भाव देखकर समझ आ गया कि वे आतंकी हो सकते हें। यह देखकर वापस आ गया।